US Strike On Venezuela: बीते दिन एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में अमेरिका ने वेनेजुएला पर अब तक का सबसे बड़ी स्ट्राइक करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में सैनिकों और नागरिकों सहित कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अब वेनेजुएला का शासन वॉशिंगटन संभालेगा।
'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व': आधी रात का वो खौफनाक हमला
अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने इस मिशन की बारीकियों का खुलासा किया। मिशन की शुरुआत 2 जनवरी की रात को हुई। राष्ट्रपति ट्रंप ने रात 10:46 बजे हमले का आदेश दिया। इस ऑपरेशन में 150 से अधिक लड़ाकू विमान (F-22, F-35, B-1 बॉम्बर्स) और घातक ड्रोन शामिल थे। हमले से पहले पूरे काराकास शहर की बिजली काट दी गई ताकि अमेरिकी सेना अंधेरे का फायदा उठा सके।
मादुरो एक किले जैसे अभेद्य महल में भारी सुरक्षा के बीच थे। अमेरिकी सेना ने महीनों तक एक 'डमी महल' बनाकर इस रेड का अभ्यास किया था। 3 जनवरी की सुबह 2:01 बजे अमेरिकी सैनिक महल में दाखिल हुए और मात्र 30 मिनट में मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स को पकड़ लिया गया। मादुरो को तुरंत युद्धपोत से न्यूयॉर्क ले जाया गया। वे अब नार्को-टेररिज्म और हथियारों की तस्करी के गंभीर आरोपों का सामना करेंगे।
'हम चलाएंगे वेनेजुएला': ट्रंप का बड़ा ऐलान
गिरफ्तारी के बाद फ्लोरिडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने भविष्य की रूपरेखा रखी। ट्रंप ने कहा, 'हम तब तक वेनेजुएला को चलाएंगे जब तक कि वहां सत्ता का सुरक्षित और उचित हस्तांतरण नहीं हो जाता।' विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई के पीछे वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर नियंत्रण पाना भी एक बड़ा उद्देश्य है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिकी तेल कंपनियां जल्द ही वहां निवेश करेंगी।
मादुरो की गिरफ्तारी से पहले वेनेजुएला ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। वेनेजुएला के अधिकारियों ने इसे 'अभूतपूर्व सैन्य आक्रामकता' बताया है। हालांकि मादुरो अब अमेरिका की कस्टडी में हैं, लेकिन उनकी सरकार के बचे हुए सदस्य इसे 'किडनैपिंग' करार दे रहे हैं।