Axiom-4 Mission: एक बार फिर टल गया एक्सिओम- 4 मिशन, शुभांशु शुक्ला को करना होगा थोड़ा और इंतजार

Axiom-4 Mission: ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि, मौसम की खराब स्थिति के कारण भारतीय अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन(ISS) पर भेजने के लिए एक्सिओम-4 मिशन का प्रक्षेपण 10 जून 2025 से 11 जून 2025 तक स्थगित कर दिया गया है

अपडेटेड Jun 09, 2025 पर 8:44 PM
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प्रक्षेपण का नया समय 11 जून 2025 को शाम 5:30 बजे IST तय किया गया है

Axiom-4 Mission: भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला Axiom-4 मिशन के तहत 10 जून को अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने वाले थे। हालांकि आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस मिशन को टाल दिया गया है। ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि, मौसम की खराब स्थिति के कारण भारतीय अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन(ISS) पर भेजने के लिए एक्सिओम-4 मिशन का प्रक्षेपण 10 जून 2025 से 11 जून 2025 तक स्थगित कर दिया गया है। प्रक्षेपण का नया समय 11 जून 2025 को शाम 5:30 बजे IST तय किया गया है।

आपको बता दें कि इससे पहेल इस मिशन को 29 मई के लिए शेड्यूल किया गया था लेकिन कुछ तकनीकी खामियों के चलते इसे स्थगित कर दिया गया। फिर इसके लॉन्चिंग के लिए 10 जून कि तारीख तय की गई थी।

कौन हैं शुभांशु शुक्ला?

शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ टेस्टिंग पायलट है। वह पिछले 14 साल से फाइटर पायलट के तौर पर अपनी सेवा दे रहे हैं। उन्हें इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (HSP) के तहत चुना गया था। वे भारत की पहली स्वदेशी चालक दल वाले गगनयान मिशन के लिए शीर्ष दावेदारों में से एक भी हैं। इस यात्रा में शुभांशु शुक्ला तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ISS कि यात्रा करेंगे। वो इस अंतरिक्ष यात्रा में बतौर मिशन कमांडर अपनी भूमिका निभाएंगे।


क्या है एक्सिओम-4 मिशन?

एक्सिओम-4 (Ax-4) मिशन एक्सिओम स्पेस द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए नियोजित एक निजी अंतरिक्ष उड़ान है, जो स्पेसएक्स और नासा के सहयोग से संचालित होगी। 11 जून, 2025 को लॉन्च होने वाला यह मिशन भारत के ग्रुप कैप्टन शुभ्रांशु शुक्ला को ISS तक ले जाएगा, जो राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय होंगे। इस मिशन में हंगरी और पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल होंगे। दल लगभग दो-तीन सप्ताह तक ISS पर रहेगा और विज्ञान, प्रौद्योगिकी व अनुसंधान से संबंधित 60 से अधिक प्रयोग करेगा। यह भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए 40 से अधिक वर्षों में पहली सरकार-प्रायोजित मानव अंतरिक्ष उड़ान होगी।

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