नेपाल की बालेन शाह सरकार की एक बड़ी टेंशन फिर हो गई दूर! भारत के इस फैसले से नेपाली चाय पर आया संकट खत्म

भारत सरकार के एक फैसले से नेपाल की चाय कारोबार से जुड़ी बड़ी परेशानी खत्म हो गई है। अब नेपाली व्यापारी बिना किसी रुकावट के भारत में फिर से चाय का एक्सपोर्ट (निर्यात) कर सकेंगे, जिससे नेपाल सरकार और चाय उद्योग को बड़ी राहत मिली है

अपडेटेड May 22, 2026 पर 10:03 PM
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नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने इस कामयाबी की पुष्टि की है

नेपाल की बालेन शाह सरकार के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। पिछले कुछ समय से भारत और नेपाल के बीच चाय के बिजनेस को लेकर चल रही बड़ी टेंशन अब पूरी तरह दूर हो गई है। भारत सरकार के एक बड़े फैसले से नेपाली चाय पर मंडरा रहा संकट अब पूरी तरह खत्म हो गया है। नेपाल के चाय व्यापारी अब बिना किसी रुकावट के भारत में चाय का एक्सपोर्ट (निर्यात) दोबारा शुरू कर सकेंगे।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने इस कामयाबी की पुष्टि की है। उन्होंने पीटीआई को बताया कि राजनयिक प्रयासों के जरिए भारत को नेपाली चाय के एक्सपोर्ट में आ रही सभी रुकावटों को अब पूरी तरह हटा दिया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली में मौजूद नेपाली एम्बेसी और नेपाल के विदेश मंत्रालय के आपसी को-ऑर्डिनेशन के बाद भारतीय पक्ष ने अपने नए नियमों और डायरेक्टिव्स का रिव्यू किया है। इसके बाद चाय के एक्सपोर्ट का रास्ता साफ हो गया है।

क्या थी पूरी समस्या और क्यों टेंशन में थी नेपाल सरकार?


दरअसल, इंडियन टी बोर्ड ने भारत में आयात होने वाली चाय के लिए नए और बेहद कड़े नियमों की घोषणा की थी।भारत सरकार ने चाय में मिलावट रोकने और क्वालिटी (गुणवत्ता) सुनिश्चित करने के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की थी। इस फैसले से नेपाल के चाय निर्यातकों के सामने बहुत बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई थीं।

इन कड़े रूल्स से परेशान थे नेपाली व्यापारी

नए रूल्स के मुताबिक, भारत में एंट्री करने वाली चाय की प्रत्येक खेप (कंसाइनमेंट) की कड़ी लैब टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई थी, ताकि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों का पालन हो सके। पहले यह काम सामान्य प्रक्रियाओं और पार्शियल सैंपल टेस्टिंग से हो जाता था। नए नियम के तहत हर सैंपल की टेस्टिंग के लिए व्यापारियों को ज्यादा पैसे का भुगतान करना था। इससे एक्सपोर्ट की कॉस्ट बढ़ रही थी। चाय का सैंपल लेने के बाद, फाइनल रिपोर्ट आने तक चाय को एक निर्धारित गोदाम में रखना जरूरी था। इस प्रोसेस में 15 से 20 दिन का समय लग सकता था। इस दौरान व्यापारी न तो चाय बेच सकते थे और न ही उसे कहीं और भेज सकते थे। अगर टेस्ट फेल हो जाता तो आयातक को 15000 रुपये और जीएसटी देकर दोबारा टेस्ट कराने की रिक्वेस्ट करनी होती। अगर दूसरा टेस्ट भी फेल हो जाता, तो पूरी चाय को नष्ट करना पड़ता या वापस नेपाल भेजना पड़ता।

नेपाल के लिए क्यों अहम है भारत का बाजार?

नेपाल चाय और कॉफी विकास बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, भारत नेपाली चाय के एक्सपोर्ट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट (बाजार) है। नेपाल हर साल लगभग 15600 मीट्रिक टन चाय का एक्सपोर्ट करता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस कुल एक्सपोर्ट में से लगभग 14500 मीट्रिक टन यानी करीब 86 प्रतिशत चाय अकेले भारत को बेची जाती है। यही वजह थी कि भारत के इस कड़े फैसले से नेपाल का पूरा चाय उद्योग और वहां की सरकार भारी दबाव और नुकसान के डर से बड़ी टेंशन में आ गई थी।

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