Balochistan: 11 अगस्त को आजादी मनाने के बाद अब 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' का पासपोर्ट-करेंसी वाला दांव! क्या ये है अगला कदम
Balochistan News: बलूचिस्तान का स्वतंत्रता आंदोलन अब केवल ऐतिहासिक दिवस मनाने तक सीमित नहीं है। बल्कि यह राजनयिक और राजनीतिक मान्यता हासिल करने के एक नए चरण में पहुंच चुका है। आने वाले समय में 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' अपना खुद का पासपोर्ट जारी करेगा। साथ ही अपनी राष्ट्रीय करेंसी भी लॉन्च करेगा
Balochistan News: बलूचिस्तान के लोग 11 अगस्त को आजादी सेलिब्रेट कर रहे हैं
Balochistan News: बलूच अलगाववादी आंदोलन एक नए दौर में प्रवेश कर गया है। 11 अगस्त को 'बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाने के बाद बलूच नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की मांग तेज कर दी है। बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी कर वैश्विक बिरादरी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत कहना, लिखना और मानना तुरंत बंद करें। इसे एक संप्रभु राष्ट्र का दर्जा दें।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग और वैश्विक मंचों से अपील
मीर यार बलूच ने अपने बयान में कहा कि बलूचिस्तान का स्वतंत्रता आंदोलन अब केवल ऐतिहासिक दिवस मनाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह राजनयिक और राजनीतिक मान्यता हासिल करने के एक नए चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, आसियान, अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन और यूरोपीय देशों के सदस्य राष्ट्रों से इस मुहिम का समर्थन करने की अपील की है।
बयान में कहा गया है कि बलूच जनता के प्रति नैतिक समर्थन जारी रहना चाहिए ताकि बलूचिस्तान की धरती से पाकिस्तान जैसे संकट को पूरी तरह खत्म किया जा सके। इसके साथ ही बलूच राजनीतिक नेतृत्व के अलग-अलग धड़ों को एकजुट करने के प्रयास भी तेजी से किए जा रहे हैं।
भारतीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आभार
बलूच अलगाववादी नेता ने बलूचिस्तान के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों खासकर भारतीय मीडिया, शोधकर्ताओं और थिंक टैंकों का दिल से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थाओं ने बलूचिस्तान की आवाज को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने और बलूच जनता का पक्ष उजागर करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पासपोर्ट, करेंसी और संप्रभु संस्थानों के गठन का रोडमैप
बलूच नेतृत्व द्वारा साझा की गई योजना के मुताबिक भविष्य का स्वतंत्र बलूचिस्तान एक पूर्ण संप्रभु राष्ट्र के रूप में जाना जाएगा। आने वाले समय में रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान अपना खुद का पासपोर्ट जारी करेगा और अपनी राष्ट्रीय करेंसी लॉन्च करेगा। प्रस्तावित गणराज्य अपने खुद के मीडिया संगठन, व्यापार और वाणिज्य संस्थान और विभिन्न देशों में राजनयिक मिशन स्थापित करेगा। नया बलूच राष्ट्र अपनी विदेश नीति, रक्षा व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और संपूर्ण कूटनीति की जिम्मेदारी स्वयं संभालेगा।
11 अगस्त की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके महत्व को भी जानिए
11 अगस्त का दिन बलूच राष्ट्रवादियों के लिए काफी ऐतिहासिक माना जाता है। मीर यार बलूच के मुताबिक ब्रिटिश भारत के विभाजन से ठीक पहले 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान (कलात रियासत) ने खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश घोषित किया था। बलूच अलगाववादी समूह इसी तारीख को अपने मूल स्वतंत्रता दिवस के रूप में मानते आए हैं और अब उनका मुख्य ध्यान इसी आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक मान्यता हासिल करने पर केंद्रित है।
पाकिस्तानी सेना की पाबंदियां और ब्लैकआउट के दावे
बलूच नेता ने आरोप लगाया कि 11 अगस्त के स्वतंत्रता समारोहों को रोकने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों और सैन्य बलों ने कड़े प्रतिबंध लगाए थे। बयान में दावा किया गया कि कलात, क्वेटा और खुजदार सहित राज्य के कई हिस्सों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह निलंबित कर दी गईं।
सैन्य छावनियों और पुलिस स्टेशनों के आसपास गहरी खाइयां खोदी गईं और पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर व ड्रोन लगातार निगरानी करते रहे। अलगाववादी समूह ने दावा किया कि इन तमाम पाबंदियों और इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में समर्थकों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया। हालांकि इंटरनेट सेवा बंद होने की वजह से तस्वीरों, वीडियो और रिपोर्टों के सामने आने में देरी हुई। वैसे बलूच नेता के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
आपको बता दें कि बलूच नेतृत्व ने बलूचिस्तान को संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्रस्तावित गणराज्य वैश्विक स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय पहलों में बड़ा योगदान देने में सक्षम है। उनका कहना है कि स्वतंत्र बलूचिस्तान अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करेगा और अपने राजनीतिक, आर्थिक व कूटनीतिक संस्थानों का तेजी से विकास करेगा।
बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। यहां दशकों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है। इस क्षेत्र में जबरन गुमशुदगी, मानवाधिकार उल्लंघन और सैन्य कार्रवाई के आरोप लगातार लगते रहे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तानी अधिकारी अलगाववादी मांगों को खारिज करते हुए बलूचिस्तान को पाकिस्तान का अभिन्न अंग मानते हैं और वहां सक्रिय सशस्त्र समूहों को सुरक्षा के लिए खतरा करार देते हैं।