Balochistan Attacks: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक बार फिर भारी हिंसा और संघर्ष की खबरें सामने आई हैं। अलगाववादी समूह 'बलूच लिबरेशन आर्मी' (BLA) ने पाकिस्तानी सेना पर कहर बरपाया है। BLA ने ये दावा किया है कि पिछले 10 दिनों में 27 बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। प्रवक्ता जीयंद बलूच के बयान के मुताबिक, इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
BLA ने 'द बलूचिस्तान पोस्ट' (TBP) के माध्यम से जारी बयान में दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना के 42 जवानों को मार गिराया है। रिपोर्ट के अनुसार, हरनाई के शहरग इलाके में झड़प के दौरान सुरक्षा बलों के एक जवान को बंधक भी बना लिया गया है। संगठन ने यह भी स्वीकार किया कि इन भीषण मुठभेड़ों में उसके अपने तीन लड़ाके भी मारे गए हैं।
ड्रोन स्ट्राइक और IED ब्लास्ट से दहला बलूचिस्तान
बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए आधुनिक और घातक तरीकों का इस्तेमाल किया है। हमलों में रिमोट कंट्रोल IED धमाके, घात लगाकर किए गए हमले, चौकियों पर छापेमारी और ड्रोन स्ट्राइक शामिल हैं। BLA का दावा है कि उन्होंने झल मगसी में एक लेवी पोस्ट पर कब्जा कर लिया और वहां से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किया है।
क्वेटा से कोहलू तक हुए धमाके
यह हिंसा बलूचिस्तान के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई जिलों में फैली हुई है। क्वेटा के कम्बरानी रोड पर पुलिस की 'ईगल स्क्वाड' यूनिट पर हमला हुआ, जिसमें दो जवान घायल हुए। सोहंदा और खरान इलाकों में सैन्य काफिलों को IED से निशाना बनाया गया। कोहलू और बेसीमा में सुरक्षा बलों के साथ-साथ सरकार समर्थित सशस्त्र समूहों पर भी हमले किए गए।
11 नागरिकों की भी हुई मौत
BLA ने आरोप लगाया है कि सोहंदा इलाके में उनके हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने पास के नागरिक इलाकों में जवाबी कार्रवाई की। संगठन का दावा है कि इस सैन्य कार्रवाई में 11 आम नागरिकों की मौत हो गई है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना की ओर से अभी तक इन आंकड़ों या नागरिक मौतों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पाकिस्तान सरकार के लिए बढ़ती चुनौती
बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। विशेष रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिहाज से यह इलाका बेहद संवेदनशील है। BLA लगातार विदेशी निवेश और पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी का विरोध कर रहा है। हालिया हमलों की तीव्रता दिखाती है कि बलूच विद्रोह अब और भी संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो गया है।