गोल्ड में चीन के अचानक निवेश बढ़ाने की क्या है वजह, क्या अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड्स पर उसका भरोसा खत्म हो गया है?

पिछले कुछ समय से चीन में लोग गोल्ड में उसी तरह से इनवेस्ट कर रहे हैं, जिस तरह वे शेयरों में करते हैं। माना जा रहा है कि चीन में एक तरफ गोल्ड में निवेश पर सरकार का फोकस बढ़ा है तो दूसरी तरफ अब चीन के आम लोगों को भी गोल्ड में निवेश फायदेमंद लगने लगा है

अपडेटेड Jun 13, 2025 पर 11:53 AM
इस साल की शुरुआत में ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ में चीन की हिस्सेदारी 3 फीसदी थी, जो अप्रैल के अंत में बढ़कर 6 फीसदी पर पहुंच गई।

गोल्ड में चीन की अचानक दिलचस्पी हैरान करने वाली है। चीन की सरकार न सिर्फ खुद सोने में निवेश बढ़ा रही है बल्कि उसने अपने लोगों को भी गोल्ड में निवेश बढ़ाने को कहा है। चीन के रुख में अचानक यह बदलाव कई सवाल पैदा करता है। क्या अब अमेरिकी इकोनॉमी की ताकत पर चीन को भरोसा नहीं रह गया है? क्या चीन को डॉलर में तेज गिरावट की आशंका लग रही है? क्या डॉलर कमजोर होने जा रहा है? ये सवाल इसलिए पूछे जा रहे हैं, क्योंकि कुछ समय पहले तक अमेरिकी सरकार के बॉन्ड्स और अमेरिकी डॉलर में चीन का काफी ज्यादा निवेश था। लेकिन, अब चीन की स्ट्रेटेजी बदलती दिख रही है।

इंश्योरेंस कंपनियों को गोल्ड में निवेश करने का निर्देश

चीन ने इस साल मार्च में एक बड़ा फैसला लिया। चाइना बैंकिंग एंड इंश्योरेंस रेगुलेटरी कमीशन (CBIRC) ने सभी इंश्योरेंस कंपनियों को अपने एसेट्स का कम से कम 1 फीसदी Gold में इनवेस्ट करने को कहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सीबीआईआरसी के इस फैसले ने चौंकाया था। आम तौर पर रेगुलेटर्स इंश्योरेंस, बैंक या दूसरी फाइनेंशियल संस्थाओं को बॉन्ड्स में इनवेस्ट करने को कहते हैं। इससे पहले चीन के पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PCB) ने चीन के लोगों को Physical Gold में इनवेस्ट करने को कहा था। इससे चीन में गोल्ड के कंजम्प्शन में 34 फीसदी उछाल देखने को मिला था।


गोल्ड ईटीएफ में चीन का निवेश जनवरी से अप्रैल के बीच दोगुना हुआ

चीन के लोग गोल्ड फंड्स में भी जमकर इनवेस्ट कर रहे हैं। अप्रैल में इनवेस्टर्स ने गोल्ड ईटीएफ में 7.4 अरब डॉलर का निवेश किया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक, यह मार्च में गोल्ड ईटीएफ में निवेश के मुकाबले दोगुना है। WGC के सीनियर मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट जॉन रीड का कहना है कि गोल्ड ईटीएफ में दुनिया के दूसरे इलाकों की भी दिलचस्पी बढ़ी है। लेकिन, पहली बार चीन की इतनी ज्यादा दिलचस्पी दिख रही है। इस साल की शुरुआत में ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ में चीन की हिस्सेदारी 3 फीसदी थी, जो अप्रैल के अंत में बढ़कर 6 फीसदी पर पहुंच गई।

चीन में लोग शेयरों की तरह गोल्ड में कर रहे इनवेस्ट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ समय से चीन में लोग गोल्ड में उसी तरह से इनवेस्ट कर रहे हैं, जिस तरह वे शेयरों में करते हैं। माना जा रहा है कि चीन में एक तरफ गोल्ड में निवेश पर सरकार का फोकस बढ़ा है तो दूसरी तरफ अब चीन के आम लोगों को भी गोल्ड में निवेश फायदेमंद लगने लगा है। चीन दुनिया में गोल्ड बार और कॉइन का सबसे बड़ा खरीदारा है, जबकि गोल्ड ज्वैलरी का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। पहले पायदान पर इंडिया है। हाल तक गोल्ड ईटीएफ में चीन के लोगों की कम दिलचस्पी थी। लेकिन, अब लोग इसमें भी जमकर निवेश कर रहे हैं। इस तरह से गोल्ड से जुड़े हर इंस्ट्रूमेंट्स में चीन में जबर्दस्त निवेश हो रहा है।

गोल्ड ने इस साल दिया 30 फीसदी रिटर्न

गोल्ड ने इस साल करीब 30 फीसदी रिटर्न दिया है। यह किसी दूसरे एसेट क्लास के रिटर्न से काफी ज्यादा है। अप्रैल में गोल्ड की कीमतें 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थीं। फिर उसमें गिरावट शुरू हुई, जिसकी बड़ी वजह मुनाफावसूली थी। लेकिन, 13 जून को ईरान के परमाणु ठिकानों पर इजरायल के हमलों के बाद गोल्ड में फिर से जबर्दस्त तेजी दिखी है। गोल्ड ने 3400 डॉलर प्रति औंस के रेसिस्टेंस लेवल को तोड़ दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है ईरान के जवाबी हमलों के बाद गोल्ड 3,500 डॉलर के अपने पुराने ऑल-टाइम हाई के पार जा सकता है।

अमेरिका के साथ बढ़ता टकराव है वजह

चीन के गोल्ड में अचानक दिलचस्पी बढ़ने की वजह अमेरिका के साथ उसका ट्रेड वॉर है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल 20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। तब से चीन उनके निशाने पर है। चीन को कमजोर करने के लिए उन्होंने टैरिफ को अपना हथियार बनाया। आखिरकार उन्होंने अप्रैल में रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान कर दिया। चीन और अमेरिका ट्रेड वॉर को खत्म करने के लिए दो बार बैठक कर चुके हैं। पहले जेनेवा में बैठक हुई। फिर पिछले हफ्ते के अंत में लंदन में बैठक हुई।

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चीन अमेरिका पर भरोसा करने को तैयार नहीं

चीन के रेयर अर्थ मैगनेट्स की सप्लाई रोकने के बाद अमेरिका चीन से बातचीत करने को मजबूर हुआ है। लेकिन, चीन को अब भी अमेरिका पर भरोसा नहीं है। दो दौर की बैठक के बाद भले ही अमेरिका ने कहा है कि दोनों में ट्रेड को लेकर डील हो चुकी है। लेकिन, अभी इसके बारे में कुछ भी विस्तार से नहीं बताया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन ने आगे अनिश्चितता को देखते हुए अपनी स्ट्रेटेजी बदल दी है। एक तरफ अमेरिका को एक्सपोर्ट में आई गिरावट की भरपाई के लिए वह कई दूसरे देशों के बाजार पर फोकस बढ़ा रहा है तो दूसरा वह अमेरिका डॉलर और बॉन्ड्स की जगह सोने में निवेश कर रहा है।

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