अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एयरस्ट्राइक कर तेहरान समेत कई शहरों में तबाही मचा दी है। अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयात्तुल्ला अली खामेनाई की भी मौत हो गई है। वहीं इस हमले के बाद ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वे अपने ऊपर हुए हमले को क्यों नहीं रोक पाए। ईरान ने बड़े पैमाने पर चीनी डिफेंस सिस्टमों की खरीद की थी। लेकिन, कोई भी चीनी हथियार काम नहीं आया। चीन का एक चर्चित एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9B एक बार फिर जांच के घेरे में है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका और इज़राइल के हालिया हवाई हमलों के दौरान ईरान में यह सिस्टम प्रभावी साबित नहीं हो पाया।
चीन ने हथियारों पर उठने लगे सवाल
बताया जा रहा है कि पिछले एक साल में यह दूसरी बार है जब HQ-9B सिस्टम पर सवाल उठे हैं। इससे पहले मई 2025 में पाकिस्तान में तैनात यह सिस्टम भारतीय फायरिंग के सामने कामयाब नहीं हो सका था। ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए जुलाई 2025 में चीन से ‘तेल के बदले हथियार’ डील के तहत यह सिस्टम खरीदा था। यह खरीद पिछले साल जून में इज़राइल के साथ हुए सीज़फायर के बाद की गई थी। जून में इज़राइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए उसके अंदर तक हवाई हमले किए थे। इस ऑपरेशन के अंत में अमेरिका ने भी ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। अब ताजा घटनाओं के बाद चीन के इस एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
जुलाई 2025 के हमले के बाद ईरान ने चीन से खरीदकर जो HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम लगाया था, वह 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के सामने असरदार साबित नहीं हो सका। यह सिस्टम तेहरान की अहम जगहों के साथ-साथ नतांज और फोर्डो के महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों के आसपास तैनात था। लेकिन हमलों के दौरान यह आने वाली मिसाइलों को रोक नहीं पाया। इससे इस सिस्टम की वास्तविक क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालिया हमलों में तेहरान सहित ईरान के 31 में से 20 से अधिक प्रांत प्रभावित हुए। इन हमलों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ और 550 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है।
भारतीय हमलों के सामने फेल हुआ था HQ-9B
चीन में बना HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम एक साल के अंदर दूसरी बार सवालों के घेरे में आ गया है। मई 2025 में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह सिस्टम पाकिस्तान में भी प्रभावी साबित नहीं हुआ था। यह ऑपरेशन कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसके चलते भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण सैन्य टकराव चला। उस समय पाकिस्तान ने अपने एयरबेस और बड़े शहरों की सुरक्षा के लिए HQ-9B सिस्टम तैनात किए थे। लेकिन भारत के हमलों के दौरान यह सिस्टम कई जगह असफल रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय कार्रवाई में इज़रायली मूल के हारोप ड्रोन का भी इस्तेमाल हुआ, जिन्होंने पाकिस्तानी एयर डिफेंस यूनिट्स को नुकसान पहुंचाया।
मई 2025 में रक्षा विशेषज्ञ टॉम कूपर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि कराची में पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गया था और वह भारतीय हमलों को रोकने में नाकाम रहा। अब ईरान में हालिया घटनाओं के बाद HQ-9B की वास्तविक क्षमता को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है।
चीन का HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम क्या है?
HQ-9B चीन का एक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे चीन की एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (CASIC) ने विकसित किया है। माना जाता है कि इसकी डिजाइन रूस के S-300PMU और अमेरिका के पैट्रियट PAC-2 सिस्टम से प्रेरित है। इस सिस्टम की मारक क्षमता लगभग 260 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह करीब 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ रहे लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। इसमें आधुनिक रडार तकनीक और इंफ्रारेड सीकर लगे होते हैं, जो एक साथ लगभग 100 संभावित खतरों को ट्रैक कर सकते हैं। इनमें से छह से आठ लक्ष्यों पर एक साथ हमला किया जा सकता है। चीन इस सिस्टम का इस्तेमाल अपनी राजधानी बीजिंग, तिब्बत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर जैसे संवेदनशील इलाकों की हवाई सुरक्षा के लिए करता है।
ईरान को उम्मीद थी कि वह अपने रूसी S-300PMU2 सिस्टम की कमियों को नए चीनी HQ-9B से पूरा कर लेगा। इससे पहले S-300PMU2 उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया था। तेहरान ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए HQ-9B को अपने स्थानीय सिस्टम जैसे बावर-373, खोरदाद-15 और रूसी पैंटिर-S1 के साथ मिलाकर कई परतों में तैनात किया था। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संयुक्त व्यवस्था भी अमेरिका और इजरायल के आधुनिक लड़ाकू विमानों के सामने प्रभावी साबित नहीं हुई।
हालिया असफलता के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रूसी विश्लेषक विक्टर केवर्ट ने दावा किया कि चीन द्वारा ईरान को दिए गए तीन HQ-9B सिस्टम हमले के शुरुआती घंटों में ही नष्ट कर दिए गए। उनका कहना है कि पाकिस्तान और वेनेजुएला के बाद अब ईरान में भी चीनी सैन्य उपकरण अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। विशेषज्ञ अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या HQ-9B सिस्टम में तकनीकी कमजोरी है या फिर अमेरिका और इजरायल की एडवांस तकनीक के सामने यह पीछे रह गया। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि अगर एयर डिफेंस मजबूत होता, तो हालात अलग हो सकते थे।