Ali Khamenei Funeral: 'अमेरिका मुर्दाबाद...'; ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार में ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी
Ali Khamenei Funeral: तेहरान में मारे गए पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के लिए ईरान में हफ्ते भर से चल रहा सार्वजनिक विदाई का कार्यक्रम अब खत्म होने वाला है। इस दौरान यहां पर बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिन्होंने "अमेरिका मुर्दाबाद", "इजराइल मुर्दाबाद" और "ट्रम्प और बीबी को मार डालो" के नारे लगाए।
ईरान में खामेनेई की अंतिम संस्कार में ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी
Ali Khamenei Funeral: तेहरान में मारे गए पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के लिए ईरान में हफ्ते भर से चल रहा सार्वजनिक विदाई का कार्यक्रम अब खत्म होने वाला है। इस दौरान यहां पर बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिन्होंने "अमेरिका मुर्दाबाद", "इजराइल मुर्दाबाद" और "ट्रम्प और बीबी को मार डालो" के नारे लगाए। इस कार्यक्रम में लोग ईरान के झंडे, खामेनेई की तस्वीरें और बदले का प्रतीक लाल झंडा हाथ में लिए नजर आए। वहीं, आयोजकों ने इसे ईरान की ताकत और अपनी आजादी की रक्षा करने की इच्छा का प्रदर्शन बताया।
अंतिम संस्कार समारोह में प्रतिशोध की मांगें हावी रहीं
शोक सभा में शोक के साथ-साथ अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रतिशोध की बार-बार मांगें भी उठाई गईं। अंतिम संस्कार की प्रार्थना से पहले एक कविता पाठ के दौरान, कवि मोहम्मद रसौली ने घोषणा की, “अब से कफन हमारा वस्त्र है। मैं तुम्हारे खून की कसम खाता हूं, ट्रंप की हत्या हमारी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने आगे यह भी पूछा कि डोनाल्ड ट्रंप अभी भी जीवित क्यों हैं और कहा कि अगर खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को नहीं मारा गया तो यह शर्मनाक होगा। हालांकि, इन टिप्पणियों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, लेकिन उपस्थित अधिकांश लोगों ने जोरदार जयकारे लगाए।
वहीं, ताबूतों के पास कई संदेश लिखे थे, जिसमें से एक था: “ट्रंप को मार डालो।”
इसके अलावा, पूरे समारोह के दौरान, शोक मनाने वाले बार-बार “कोई समझौता नहीं, कोई आत्मसमर्पण नहीं, केवल बदला” के नारे लगाते रहे।
ईरानी नेता शामिल हुए, मोजतबा नहीं आए
मुख्य प्रार्थना 97 वर्षीय आयतुल्लाह जाफर सोभानी (क़ुम) ने कराई। इस दौरान खामेनेई के परिवार के चार सदस्यों के लिए भी प्रार्थना की गई, जिनमें उनकी बहू जहरा हद्दाद आदेल और 14 महीने की पोती जहरा मोहम्मदी गोलपायगानी शामिल थीं।
वहीं, इस मौके पर ईरान के राजनीतिक, सैन्य और न्यायिक तंत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा, अल-कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी और IRGC कमांडर अहमद वाहिदी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। हालांकि, मोजतबा खामेनेई, जिन्हें उनके पिता की मौत के 10 दिन बाद सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था, इस समारोह में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति इसलिए भी खास तौर पर ध्यान देने योग्य थी क्योंकि उनके भाई मुस्तफा, मसूद और मेसम अपने पिता के ताबूत के पास खड़े थे।
अधिकारियों के अनुसार, मोजतबा हमलों में घायल हो गए थे, लेकिन चेहरे पर स्थायी रूप से कोई विकृति आने या शरीर का कोई अंग कटने की खबरों का खंडन किया।
अधिकारियों ने ईरान के संकल्प का बचाव किया
आर्मेनिया में ईरान के राजदूत खलील शिरघोलमी ने X पर लिखा कि खामेनेई की मौत से देश के आदर्श कमजोर नहीं होंगे।
उन्होंने लिखा, "आपने अयातुल्ला खामेनेई को मार डाला, लेकिन असल में आपने इत्र की एक शीशी तोड़ी है, जिसकी खुशबू अब हर जगह फैल गई है।"
नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहम्मद बाघेरी जोलघाद्र ने कहा कि शोक मनाने वाले दो साफ संदेश दे रहे हैं — ईरान के दुश्मनों का विरोध और मारे गए नेता का बदला।
Calls to kill Trump at the funeral of Ali Khamenei: "Whoever killed my Imam, why don't we kill him? This is our disgrace. If we don't kill the murderer, from now on we will wear shrouds instead of ordinary clothes. I swear by your blood, Trump's murder is on our necks, it is… pic.twitter.com/K3s0IpbY73
36 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान होने के बावजूद, सुबह होने से पहले ही प्रार्थना हॉल भर गया, जिसमें लगभग 30,000 लोगों के बैठने की जगह है। कुछ शोक मनाने वालों ने सफेद कफन पहना था, जो शहीद होने की उनकी इच्छा को दिखाता है।
अधिकारियों ने लोगों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया, लेकिन अनौपचारिक अनुमानों के अनुसार, समारोह के पहले दिन 20 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। कई लोग दूर-दराज से आए थे और स्कूलों, दफ्तरों, मस्जिदों और निजी घरों में बने अस्थायी ठिकानों पर रुके थे। जिनको वॉलंटियर्स ने पूरे दिन खाना, फलों का रस और चाय बांटे।
गार्जियन के अनुसार, एक शोक मनाने वाली लीला अहमदी (बोयर-अहमद) ने कहा, “जरूरत पड़ी तो हम अमेरिकियों से कांटों-फावड़ों से भी लड़ेंगे।”
एक अन्य उपस्थित 70 वर्षीय पुस्तक अनुवादक हुसैन देहगान ने कहा कि पश्चिम की आलोचना के बावजूद कई ईरानी खामेनेई का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार से असहमति का मतलब यह नहीं है कि लोग विदेशी दखल का समर्थन करेंगे।
एक और निवासी, इब्राहिम कलीम ने इजराइली बमबारी में बाल-बाल बचने की घटना को याद किया और कहा कि कई ईरानी सुधार चाहते हैं, लेकिन उनका मानना है कि यह सुधार बाहरी दबाव के बजाय देश के भीतर से ही आना चाहिए।