अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को सीमित करने की एक नई पहल की है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इमिग्रेशन से जुड़े दो कार्यकारी आदेश साइन किए हैं। इनमें से एक अमेरिका में पैदा होने वाले उन लोगों की संख्या को सीमित करेगा, जो यहां नागरिकता पाने के हकदार हैं। कुछ हफ्ते पहले ही अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था को खत्म करने की उनकी बड़ी कोशिश को मंजूरी नहीं दी थी। अब ट्रंप ने पुराना तरीका अपनाने की बजाय दो नए कार्यकारी आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत कुछ खास श्रेणी के विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर इन लोगों के बच्चे अमेरिका में जन्म लेते हैं, तो उन्हें पहले की तरह अपने-आप अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी।
अमेरिका में जन्म लेने भर से नहीं मिलेगी नागरिकता!
'द वॉशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, नए आदेशों का उद्देश्य कुछ खास विदेशी लोगों के बच्चों को जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता से बाहर रखना है। इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिन्हें विदेशी आतंकवादी संगठनों का सदस्य या विदेशी सरकारों के लिए रजिस्टर लॉबिस्ट माना जाता है। एक अलग कार्यकारी आदेश उन लोगों पर भी लागू होगा जिन पर सिर्फ बच्चे को अमेरिका में जन्म दिलाने के लिए टूरिस्ट वीजा लेकर आने का आरोप है। सरकार का कहना है कि अगर वीजा गलत जानकारी देकर लिया गया है, तो उसके आधार पर बच्चे को अमेरिकी नागरिकता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। ट्रंप का यह कदम उनकी पुरानी इमिग्रेशन नीति को आगे बढ़ाने की नई कोशिश माना जा रहा है। इस बार उन्होंने ऐसे कानूनी रास्ते अपनाने की कोशिश की है, ताकि वे उन बाधाओं से बच सकें जिनकी वजह से इस साल की शुरुआत में उनका पहला कार्यकारी आदेश लागू नहीं हो पाया था।
व्हाइट हाउस में बोलते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता का अधिकार बरकरार रखा गया था। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद उनकी सरकार अब इस मुद्दे पर अलग कानूनी रास्ता अपनाएगी। ट्रंप के पहले नए कार्यकारी आदेश का असर अमेरिका में रहने वाले लोगों के एक छोटे वर्ग पर पड़ेगा।
दूसरा कार्यकारी आदेश 'बर्थ टूरिज्म' यानी सिर्फ बच्चे को अमेरिका में जन्म दिलाने के लिए की जाने वाली यात्रा पर केंद्रित है। सरकार का कहना है कि कुछ लोग घूमने के नाम पर टूरिस्ट वीजा लेते हैं, लेकिन उनका असली उद्देश्य अमेरिका में बच्चे को जन्म देना होता है। ऐसे मामलों को वीजा नियमों का गलत इस्तेमाल माना गया है। इसलिए प्रशासन का तर्क है कि ऐसे बच्चों को अपने-आप अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि, अगर ये नए आदेश लागू भी हो जाते हैं तब भी इनका असर ट्रंप के पहले प्रस्ताव जितना बड़ा नहीं होगा। पहले प्रस्ताव में बिना वैध दस्तावेज वाले प्रवासियों और कई तरह के अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को नागरिकता देने से इनकार करने की बात कही गई थी।
संवैधानिक विवाद अब भी जारी
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति सिर्फ कार्यकारी आदेश जारी करके संविधान के 14वें संशोधन का अर्थ नहीं बदल सकते। साल 1868 में लागू हुए इस संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोगों को नागरिकता का अधिकार दिया गया है। इसके केवल कुछ सीमित अपवाद हैं, जैसे विदेशी राजनयिकों के बच्चे।इस साल जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक अहम फैसले में इसी व्यवस्था को सही ठहराया था। अदालत ने साफ कहा कि संविधान के अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोगों को जन्म के आधार पर नागरिकता मिलती है। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन की इस अधिकार को सीमित करने की बड़ी कोशिश को अदालत ने मंजूरी नहीं दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के नए कार्यकारी आदेशों को भी जल्द ही अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इमिग्रेशन कानून के जानकारों का कहना है कि नागरिकता से जुड़े नियमों में इतना बड़ा बदलाव केवल राष्ट्रपति के आदेश से नहीं किया जा सकता। इसके लिए संविधान में संशोधन या संसद के जरिए नया कानून बनाना जरूरी होगा।
एक और कानूनी लड़ाई की तैयारी
डोनाल्ड ट्रंप के नए कदम से साफ है कि उनकी सरकार इमिग्रेशन से जुड़े अपने बड़े वादों को पूरा करने की कोशिश जारी रखेगी, भले ही पहले उन्हें अदालत में झटका लगा हो। हालांकि इस बार जारी किए गए आदेश पहले की तुलना में सीमित दायरे वाले हैं, लेकिन इनके कारण एक बार फिर कानूनी विवाद शुरू होने की संभावना है। अब संघीय अदालतों को यह तय करना पड़ सकता है कि क्या व्हाइट हाउस संविधान में बदलाव किए बिना जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता के नए अपवाद बना सकता है। इस मामले का फैसला अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक गारंटियों में से एक के भविष्य पर असर डाल सकता है। साथ ही यह भी साफ करेगा कि राष्ट्रपति कार्यकारी आदेशों के जरिए नागरिकता से जुड़े नियमों में कितने बड़े बदलाव कर सकते हैं।