अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर लगभग सहमति बन चुकी है। इस समझौते में दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की बात शामिल है, ताकि जहाज बिना किसी रोक-टोक और टैक्स के गुजर सकें।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान इतनी आसानी से होर्मुज पर अपना नियंत्रण छोड़ देगा?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि अमेरिका, ईरान और कई क्षेत्रीय देशों के बीच “शांति समझौते” का मसौदा लगभग तैयार है। उन्होंने कहा कि अंतिम बातचीत जारी है और जल्द ही पूरी जानकारी सामने आएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि तेल के जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल करना इस समझौते की सबसे जरूरी शर्त है।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सऊदी अरब, यूएई, कतर, पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं से भी इस मुद्दे पर बात की है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि अगले कुछ घंटों या रविवार तक ईरान को लेकर “अच्छी खबर” आ सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते में कुल 14 पॉइंट हैं। इसमें:
हालांकि, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने यूरेनियम वाली खबर को “प्रोपेगेंडा” बताया और कहा कि परमाणु मुद्दे पर अलग से बातचीत होगी।
ईरान ने ट्रंप के दावों को “अधूरा और हकीकत से अलग” बताया।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अभी कई मुद्दों पर चर्चा बाकी है। उन्होंने कहा कि अगले 3-4 दिनों में स्थिति साफ हो सकती है।
ईरान का कहना है कि होर्मुज को लेकर कोई भी अंतिम फैसला ईरान और ओमान जैसे क्षेत्रीय देशों की सहमति से ही होगा।
साथ ही, ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करे, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और उसके विदेशों में फंसे पैसे वापस मिलें।
ईरान इतनी आसानी से क्यों नहीं मानेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान होर्मुज पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा, क्योंकि यह उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
होर्मुज ईरान के दक्षिणी तट के बेहद करीब है। ईरान को डर है कि अगर अमेरिका का नियंत्रण बढ़ा तो उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
ईरान की सरकार खुद को पश्चिमी ताकतों के खिलाफ खड़ा दिखाती है। ऐसे में होर्मुज जैसे रणनीतिक इलाके पर नियंत्रण छोड़ना उसके लिए राजनीतिक रूप से भी बड़ा झटका माना जाएगा।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिका इसे बड़ी सफलता बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान साफ कर चुका है कि वह अपनी शर्तों के बिना कोई बड़ा समझौता नहीं करेगा। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह डील सच में होती है या फिर तनाव और बढ़ता है।