Iran-US Tensions: पश्चिम एशिया में जारी भारी सैन्य तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान के दक्षिणी बुशहर प्रांत में देर रात ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम अचानक एक्टिवेट हो गए। इसके बाद ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उन्होंने एक अमेरिकी हवाई घुसपैठ को नाकाम करते हुए अमेरिकी जहाज/विमान को मार गिराया है। हालांकि, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, गुरुवार देर रात ईरान के दक्षिणी बुशहर प्रांत में अमेरिकी विमानों से जुड़ी एक हवाई घुसपैठ देखी गई। इसके बाद ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को तुरंत एक्टिवेट कर दिया गया।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास जहाजों पर हमला
ईरान और अमेरिका के बीच यह ताजा हवाई टकराव उस घटना के कुछ ही घंटों बाद सामने आया है, जिसमें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास काम कर रहे चार जहाजों पर कथित तौर पर हमले किए थे। बताया जा रहा है कि इन चार जहाजों में वे पोत भी शामिल थे जिनके तार कथित रूप से अमेरिका से जुड़े हुए थे।
अमेरिका ने ईरान पर थोपे नए आर्थिक प्रतिबंध
इस सैन्य तनाव के बीच वाशिंगटन ने तेहरान पर अपनी आर्थिक कार्रवाई भी तेज कर दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के सैन्य-संबद्ध तेल व्यापार और राजस्व नेटवर्क को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया है। इससे ईरान पर आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ गया है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: अमेरिका को अब तक भारी नुकसान
इस बीच कांग्रेशनल रिसर्च सर्विसकी एक नई रिपोर्ट में ईरान के साथ जारी इस संघर्ष में अमेरिका को हुए भारी सैन्य और वित्तीय नुकसान का बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे सैन्य अभियान को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी कोड-नाम दिया गया है। पेंटागन के कार्यवाहक नियंत्रक जूल्स हर्स्ट के बयान के मुताबिक इस सैन्य अभियान की कुल लागत अब बढ़कर लगभग 29 अरब डॉलर ($29 Billion) तक पहुंच गई है। इस खर्च का एक बड़ा हिस्सा उन्नत लड़ाकू विमानों और प्लेटफॉर्म्स को बदलने व उनकी मरम्मत करने से जुड़ा है। 28 फरवरी से लेकर अब तक कम से कम 42 अमेरिकी सैन्य विमान या तो नष्ट हो चुके हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
अमेरिका को सबसे बड़ा नुकसान अनमैन्ड एरियल सिस्टम के मोर्चे पर हुआ है। ईरान के कड़े सुरक्षा घेरे वाले हवाई क्षेत्र में खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही अभियानों के दौरान अमेरिकी सेना ने अपने 24 MQ-9 रीपर ड्रोन खो दिए हैं। एक अकेले MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत करीब 30 मिलियन डॉलर है, इस लिहाज से केवल ड्रोनों के नुकसान से अमेरिका को 720 मिलियन डॉलर से अधिक की चपत लगी है रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अप्रैल महीने में एक ऑपरेशनल घटना के दौरान अमेरिका का एक हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस ड्रोन MQ-4C ट्राइटन भी क्रैश हो गया था।
15 अमेरिकी सैनिकों की मौत, 538 घायल
यह नुकसान केवल विमानों और पैसों तक ही सीमित नहीं है। आधिकारिक पेंटागन रिकॉर्ड और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अपडेट्स ने पुष्टि की है कि इस संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक 15 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं। वहीं कम से कम 538 सैन्य कर्मी घायल हुए हैं।