'बम बरसाकर नरक बना दूंगा...', डील के तुरंत बाद ट्रंप की ईरान को खुली धमकी, फिर सहमा मिडिल ईस्ट

Donald Trump Warning to Iran: G7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा, 'अगर तेहरान ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया, तो अमेरिका उन पर बम बरसा कर तबाह कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि, मैं चाहता हूं कि वे इस समझौते का सम्मान करें'

अपडेटेड Jun 18, 2026 पर 10:47 AM
डील के बाद ट्रंप के रुख में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव भी देखने को मिला

Donald Trump Warning to Iran: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक 'इस्लामाबाद समझौते' पर हस्ताक्षर हो चुका है। इस डील के कुछ ही देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। G7 शिखर सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा, 'अगर तेहरान ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया, तो अमेरिका उन पर बम बरसा कर तबाह कर देगा।

ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा, 'अगर उन्होंने समझौते का उल्लंघन किया, तो हम उन पर बम बरसाकर नरक बना देंगे। हालांकि, मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि वे इस समझौते का सम्मान करें।'

60 दिनों की बातचीत और तेल की कीमतों पर नजर


डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानियों को 'स्मार्ट' बताते हुए उम्मीद जताई कि अगले 60 दिनों में होने वाली तकनीकी स्तर की बातचीत से एक स्थायी शांति समझौता स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते से न केवल मिडिल ईस्ट में शांति बहाल होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों को नीचे लाने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

मिसाइल प्रोग्राम पर बदले ट्रंप के सुर?

इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव भी देखने को मिला। इससे पहले ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल नेटवर्क को पूरी तरह तबाह करने की कसम खाने वाले ट्रंप ने अब नरम रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें न होना 'अन्यायपूर्ण' होगा।

यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि इससे पहले उन्होंने कहा था, 'अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, या उन्होंने सही व्यवहार नहीं किया, तो हम सीधे उनके सिर के ठीक बीच में बम गिराना शुरू कर देंगे।'

'बिना लड़े ईरान ने सब कुछ हासिल किया'

ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप की इस ताजा और तीखी बयानबाजी पर फिलहाल कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसके बजाय ईरान ने इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाने के लिए उन दस्तावेजों और तस्वीरों को सार्वजनिक किया है, जो साल 1979 में इस्लामिक क्रांति की स्थापना के बाद पहली बार किसी अमेरिकी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच हुए समझौते को दर्शाती हैं।

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ ने सरकारी टेलीविजन पर गर्व से कहा, 'जो कुछ भी हम सैन्य कार्रवाई के जरिए हासिल करना चाहते थे, वह हमने बातचीत के जरिए कई गुना ज्यादा हासिल कर लिया है। इन दोनों की आपस में कोई तुलना ही नहीं है।' गालिबफ का इशारा इस समझौते के तहत ईरान की उन अरबों डॉलर की संपत्तियों की तरफ भी था, जो पहले अमेरिका द्वारा फ्रीज कर दी गई थीं और अब इस डील के बाद जारी होने वाली हैं।

कैसे शुरू हुआ था यह महायुद्ध?

इस खूनी संघर्ष की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अचानक बड़े सैन्य हमले किए थे। युद्ध के पहले ही दिन ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए थे।

देखते ही देखते यह लड़ाई पूरे क्षेत्र में फैल गई, जिसने अब तक 7,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है। इनमें से सबसे ज्यादा मौतें ईरान और लेबनान में हुई हैं। इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों को बढ़ा दिया, महंगाई का दबाव पैदा किया और कई विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी थीं।

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