अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस की बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब तक 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 100 से अधिक संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं। कांगो के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात तब और गंभीर हो गए जब गुस्साए लोगों ने इबोला मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए एक स्वास्थ्य केंद्र में आग लगा दी। इस घटना के बाद कई संदिग्ध मरीज वहां से भाग निकले और अब उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
एक और अस्पताल पर हुआ हमला
वहीं पूर्वी कांगो में इबोला इलाज केंद्र में आग लगाने की घटना के कुछ दिनों बाद अब एक और अस्पताल पर हमला हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोगों ने अस्पताल में घुसकर गोलीबारी की। यह घटना मोंगबवालू जनरल अस्पताल में हुई। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रिचर्ड लोकुडू ने बताया कि हमलावर अपने दो रिश्तेदारों के शव मांग रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे ही गोलियों की आवाज सुनाई दी, अस्पताल के कर्मचारियों ने तुरंत मरीजों और स्टाफ को सुरक्षित जगह पर पहुंचाना शुरू कर दिया। डॉ. लोकुडू के मुताबिक, घटना के बाद मोंगबवालू जनरल अस्पताल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
100 के पार पहुंची मृतकों की संख्या
यह घटना रवाम्पारा में इबोला इलाज केंद्र में आग लगाए जाने की घटना के कुछ दिनों बाद सामने आई है। मोंगबवालू में भी ऐसी ही एक घटना हुई, जहां स्थानीय लोगों के एक समूह ने ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ संस्था के एक टेंट पर हमला कर दिया। इस टेंट में इबोला के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा था। हमलावरों ने टेंट में आग भी लगा दी। डॉ. रिचर्ड लोकुडू ने बताया कि इस हमले के बाद इबोला संक्रमण के शक वाले 18 लोग इलाज केंद्र से चले गए और अब उनका कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं, कांगो के संचार मंत्रालय ने रविवार को जानकारी दी कि देश में इबोला के 904 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर मामले पूर्वोत्तर के इटुरी प्रांत में हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इबोला से संदिग्ध मौतों की संख्या अब 119 तक पहुंच गई है।
पिछले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला के खतरे को बढ़ाकर सबसे ऊंचे स्तर “बहुत अधिक” कर दिया। वहीं मध्य अफ्रीका में इस खतरे को “अधिक” माना गया है, जबकि दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए जोखिम फिलहाल “कम” बताया गया है। इबोला एक बेहद गंभीर और कई बार जानलेवा बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, वीर्य या शरीर के दूसरे तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। पहले भी यह वायरस मरीजों की देखभाल और अंतिम संस्कार जैसी गतिविधियों के दौरान तेजी से फैल चुका है।
इस बार फैला इबोला वायरस ‘बुंडिबुग्यो’ नाम के दुर्लभ प्रकार का है। फिलहाल इसके लिए कोई मंजूर टीका या खास दवा उपलब्ध नहीं है। WHO ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह संक्रमण दूसरे इलाकों तक फैल सकता है। इसी वजह से संगठन ने दुनिया भर के देशों से मिलकर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इबोला से मरने वाले लोगों के शव भी बेहद संक्रामक हो सकते हैं। ऐसे में जब लोग शव को दफनाने की तैयारी करते हैं या अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं, तब यह बीमारी और तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है।