Eiffel Tower Closed: महिलाओं को 'अदृश्य' रहने के फरमान पर पेरिस में बवाल! हिंदू धार्मिक समूह के दौरे पर मचा विवाद, बंद हुआ एफिल टॉवर

Eiffel Tower Closed: सोमवार (7 सितंबर) को एफिल टॉवर बंद कर दिया गया क्योंकि कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। यह हड़ताल एक हिंदू धार्मिक समूह के हालिया निजी दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनकी पोस्ट से हटाने के निर्देशों के विरोध में की गई थी। बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) से जुड़े लगभग 100 लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को पेरिस के इस मशहूर स्मारक का दौरा किया

अपडेटेड Sep 08, 2026 पर 8:24 AM
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Eiffel Tower Closed: यह दौरा उसी दिन हुआ जिस दिन हिंदू समूह ने सीन नदी पर एक सांस्कृतिक नाव जुलूस का आयोजन किया था

Eiffel Tower Closed: पेरिस का मशहूर एफिल टावर सोमवार (7 सितंबर) को कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बंद रहा। यह हड़ताल एक विवादित व्यवस्था के विरोध में की गई, जिसमें कर्मचारियों के मुताबिक एक हिंदू धार्मिक समूह के निजी दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को अपने वर्कप्लेस से हटने और कुछ इलाकों में नहीं जाने के निर्देश दिए गए थे। इस घटना के सामने आने के बाद फ्रांस में लैंगिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। यह मामला शनिवार का है, जब करीब 100 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर पहुंचा।

यह समूह हिंदू धार्मिक संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) से जुड़ा था। इसी दिन संगठन की ओर से सीन नदी पर एक सांस्कृतिक नाव यात्रा का भी आयोजन किया गया था।

महिला कर्मचारियों को 'अदृश्य' रहने के निर्देश पर बवाल


एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने खुद इस मामले की पुष्टि की है। कंपनी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल की ओर से दौरे के दौरान महिलाओं के साथ बातचीत को सीमित रखने की शर्त रखी गई थी। SETE ने कहा कि इस अनुरोध के बाद एफिल टावर की महिला कर्मचारियों और वहां काम करने वाले ठेकेदारों की महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर 'अदृश्य' रहने के निर्देश दिए गए।

कंपनी के मुताबिक, कुछ महिला कर्मचारियों को उनकी पोस्ट से हटाकर दूसरे स्थानों पर भेज दिया गया। जबकि कुछ पदों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया। इसके अलावा, सभी महिला कर्मचारियों को प्रतिनिधिमंडल के मौजूद रहने के दौरान कुछ खास क्षेत्रों से गुजरने या उन्हें पार करने से भी रोक दिया गया। SETE ने कहा कि उसके कर्मचारियों को इस तरह की स्थिति में डालना उसके लिए हैरान करने वाला और अस्वीकार्य था।

SETE ने कहा- ऐसी शर्तें स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं

कंपनी ने स्पष्ट किया कि इस तरह की शर्तें स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं। SETE के मुताबिक, यह व्यवस्था उसके मूल्यों और फ्रांस में महिला एवं पुरुषों की समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं थी। SETE के अध्यक्ष एरियल वेइल ने भी व्यवस्था को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि एफिल टावर फ्रांस के गणतांत्रिक मूल्यों और महिला-पुरुष समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कायम रखता है।

पेरिस प्रशासन ने भी जताई नाराजगी

इस घटना पर पेरिस प्रशासन की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने कहा कि प्रबंधन का प्रतिनिधिमंडल की ऐसी शर्तों को स्वीकार करना अस्वीकार्य है। उन्होंने मामले की जांच शुरू करने की बात कही। एफिल टावर दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल है और यहां हर साल करीब 70 लाख लोग पहुंचते हैं। सोमवार को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण टावर पूरे दिन बंद रहा। इसके मंगलवार को दोबारा खुलने की उम्मीद जताई गई।

BAPS ने मांगी माफी, कहा- किसी को प्रवेश से नहीं रोका गया

विवाद बढ़ने के बाद BAPS ने कहा कि उसने एफिल टावर दौरे से जुड़ी चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है। संगठन के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल में बड़ी संख्या में लोग थे, इसलिए एफिल टावर की टीम के साथ मिलकर सामान्य खुलने के समय से पहले दौरे की व्यवस्था की गई थी। BAPS ने कहा कि इसका उद्देश्य दूसरे पर्यटकों को होने वाली परेशानी को जितना संभव हो सके कम करना था।

संगठन ने यह भी कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एफिल टावर में एंट्री करने से नहीं रोका गया था। हालांकि, विवाद को लेकर BAPS ने कहा कि इस स्थिति से किसी को ठेस पहुंची हो या असुविधा हुई हो तो वह ईमानदारी से माफी मांगता है। BAPS ने अपने बयान में आपसी सम्मान और दूसरों की सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

फ्रांस में राजनीतिक नेताओं ने की आलोचना

मामले ने फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं ने महिलाओं को इस तरह की स्थिति में रखने की आलोचना की। फ्रांस की समानता मंत्री ऑरोर बर्जे ने कहा कि फ्रांस में महिलाओं से खुद को 'मिटा लेने' या सार्वजनिक जीवन से पीछे हटने के लिए नहीं कहा जा सकता।

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उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी धर्म या धार्मिक सिद्धांत गणराज्य के कानूनों से ऊपर नहीं है। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने भी कहा कि फ्रांस महिलाओं की मौजूदगी पर इस तरह की पाबंदियों को स्वीकार नहीं करेगा। वहीं, मध्यमार्गी नेता गेब्रियल अत्ताल ने कहा कि कोई संस्कृति, विश्वास, धर्म या व्यक्ति महिलाओं को यह तय करने का अधिकार नहीं दे सकता कि सार्वजनिक जीवन में उनकी जगह क्या होनी चाहिए।

विवाद का केंद्र क्या है?

पूरे विवाद का मुख्य सवाल यह है कि किसी धार्मिक या सांस्कृतिक समूह की निजी यात्रा के लिए क्या किसी सार्वजनिक पर्यटन स्थल के कर्मचारियों की ड्यूटी में जेंडर के आधार पर बदलाव किया जा सकता है? एफिल टावर मैनेजमेंट ने फिलहाल इस व्यवस्था को अपने मूल्यों के खिलाफ माना है। मामले की जांच की बात सामने आई है। घटना ने फ्रांस में धर्म की स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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