GalaxEye Mission Drishti: अमेरिकी टेक अरबपति और स्पेसएक्स के संस्थापक एलॉन मस्क ने बेंगलुरु स्थित स्पेस स्टार्टअप गैलेक्सआई (GalaxEye's mission Drishti Launch) को 'मिशन दृष्टि (Mission Drishti)' सैटेलाइट के सफल लॉन्चिंग पर बधाई दी है। मस्क ने मंगलवार (5 मई) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 'बधाई' लिखकर यह प्रतिक्रिया दी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्ट के जवाब में थी। इसमें उन्होंने मिशन दृष्टि के लॉन्च पर GalaxEye को बधाई दी थी।
मस्क ने भारतीय झंडे का इमोजी भी अपने बधाई वाले पोस्ट में लगाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को X पर एक पोस्ट में इस लॉन्चिंग को भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। पीएम मोदी ने इसे देश के बढ़ते इनोवेशन इकोसिस्टम का प्रतीक कहा था। प्रधानमंत्री ने इसे बड़ा मील का पत्थर बताया।
PM मोदी ने कहा, "गैलेक्सआई का मिशन दृष्टि हमारी अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि है। दुनिया के पहले ऑप्टोसार (OptoSAR) सैटेलाइट एवं भारत में निर्मित सबसे बड़े निजी सैटेलाइट का सफल लॉन्च इनोवेशन और राष्ट्र निर्माण के प्रति हमारे युवाओं के जुनून का प्रमाण है।" यह सैटेलाइट स्पेसएक्स (SpaceX’s Falcon 9 rocket) के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए रविवार को कैलिफोर्निया से लॉन्च किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, Mission Drishti सैटेलाइट भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग क्षमता के जरिए सीमाओं पर होने वाली अवैध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इसको दुनिया का पहला OptoSAR सैटेलाइट बताया गया है। यह एक ही प्लेटफॉर्म पर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO) और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) सिस्टम को जोड़ता है। जहां EO सेंसर दिन की रोशनी और साफ मौसम में हाई-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें लेते हैं।
वहीं, SAR टेक्नोलॉजी रडार सिग्नल का इस्तेमाल करके हर तरह के मौसम और रोशनी में तस्वीरें लेने की सुविधा देती है। GalaxEye के मुताबिक, इन दोनों सिस्टम को एक साथ लाने से पृथ्वी की मॉनिटरिंग में लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी। इससे अलग-अलग तरह के माहौल में अधिक भरोसेमंद और लगातार डेटा इकट्ठा करना मुमकिन हो पाएगा।
Mission Drishti से रक्षा, कृषि, आपदा राहत, समुद्री निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग जैसे सेक्टर्स में मदद मिलने की उम्मीद है। इसे भारत की पृथ्वी की निगरानी से जुड़ी व्यापक क्षमताओं को और मज़बूत बनाने वाला भी माना जा रहा है, जिसमें ISRO का सैटेलाइट नेटवर्क भी शामिल है।
GalaxEye की योजना 2030 तक इस सिस्टम को बढ़ाकर 10 सैटेलाइट का एक ग्रुप बनाने की है। इसका मकसद भारत के लिए पृथ्वी की निगारानी का एक मजबूत और आत्मनिर्भर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।