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चौथी बार पाकिस्तान को लगेगा झटका! FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने की लटकी तलवार

पाकिस्तान को वर्ष 2022 में वैश्विक अपराधों पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट से हटा दिया गया था। इस लिस्ट में यह तीन बार आ चुका है और अब एक बार फिर इसमें शामिल होने की तलवार इस पर लटक रही है। जानिए ग्रे लिस्ट में शामिल होने का क्या मतलब है?

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jun 19, 2025 पर 3:17 PM
चौथी बार पाकिस्तान को लगेगा झटका! FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने की लटकी तलवार
पाकिस्तान को चौथी बार करारा झटका लग सकता है। इसकी वजह ये है कि मनीकंट्रोल को सूत्रों ने बताया है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) टेरर फाइनेंसिंग पर रोक लगाने में फेल होने के चलते आने वाले हफ्तों में चौथी बार पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट में रख सकता है।

पाकिस्तान को चौथी बार करारा झटका लग सकता है। इसकी वजह ये है कि मनीकंट्रोल को सूत्रों ने बताया है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) टेरर फाइनेंसिंग पर रोक लगाने में फेल होने के चलते आने वाले हफ्तों में चौथी बार पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट में रख सकता है। अपराधों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था एफएटीएफ इस महीने के आखिरी या अगले महीने जुलाई के शुरुआती दिनों में पाकिस्तान से जुड़ी एक मूल्यांकन रिपोर्ट जारी कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में आतंकियों के फाइनेंस को रोकने में पाकिस्तान के फेल होने और इसे फिर से ग्रे लिस्ट में रख जाने का जिक्र होगा।

पिछले हफ्ते फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में हुए एफएटीएफ के सामने भारत ने पाकिस्तान के आंतकी नेटवर्क और पाकिस्तान की सरकार से आतंकियों को मिलने वाले सपोर्ट का चिठ्ठा खोला था। इस बैठक के बारे में कुछ जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन इस बात की संभावना है कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में फिर से रखा जा सकता है

ग्रे लिस्ट में शामिल होने का क्या है मतलब?

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल होने का मतलब है कि पाकिस्तान पर निगरानी बढ़ जाएगी। इसमें ऐसे देशों को रखा जाता है जहां की सरकार मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों की फाइनेंसिंग का मुकाबला करने में सफल नहीं हो पा रही हैं। इस लिस्ट में आने के बाद एफएटीएफ अपनी निगरानी बढ़ा देती हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपने काम को अच्छे से कर रहे हैं। इससे पहले भी पाकिस्तान को वर्ष 2008-2009, वर्ष 2012-2015 और वर्ष 2018-2022 के बीच रखा गया था।

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