यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने गुरुवार, 22 जनवरी को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) को संबोधित किया। वहीं उन्होंने कहा कि, यूक्रेन, रूस और अमेरिका कल यानी 23 जनवरी को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अपनी पहली बैठक करेंगे। यह बातचीत दो दिनों तक चलेगी। बता दें कि ये मुलाकात, जेलेंस्की की दावोस में ट्रंप के साथ हुई मुलाकात के बाद हो रहा है। ट्रंप और जेलेंस्की के बीच में गुरुवार को दावोस में मीटिंग हो चुकी है, जिसके बाद ट्रंप काफी पॉजिटिव नजर आए।
जेलेंस्की ने दी ये सख्त चेतावनी
वहीं दावोस में जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों पर भड़ास निकाली है। जेलेंस्की ने यूरोप को सख्त चेतावनी दी और कहा कि हर साल बड़े वैश्विक खतरों को पहचानने के बावजूद उन पर सही तरीके से कार्रवाई नहीं की जाती। दावोस में अपने स्पीच में जेलेंस्की ने कहा, “पिछले साल भी मैंने यहीं कहा था कि यूरोप को खुद की रक्षा करना आना चाहिए। एक साल बीत गया, लेकिन कुछ भी नहीं बदला। आज भी मुझे वही बात दोहरानी पड़ रही है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप को अब देर किए बिना तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।
जेलेंस्की ने यूक्रेन की स्थिति की तुलना फिल्म ग्राउंडहॉग डे से की, जिसमें एक ही दिन बार-बार दोहराया जाता है। उन्होंने कहा, “कोई भी इंसान ऐसा जीवन नहीं जीना चाहेगा, जहां वही हालात हफ्तों, महीनों और यहां तक कि चार साल तक दोहरते रहें। लेकिन हम आज यही जी रहे हैं और यही हमारी सच्चाई है।”
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूरोप ने अब तक अपनी रक्षा और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई है। उन्होंने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद ही कई देशों ने अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करना शुरू किया। ज़ेलेंस्की ने सवाल उठाया कि इससे व्लादिमीर पुतिन और चीन को क्या संदेश जाता है। उन्होंने रूस के खिलाफ सख्त कदम न उठाने के लिए यूरोप की आलोचना भी की। ज़ेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप ने वेनेजुएला में कार्रवाई की और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को गिरफ्तार किया गया। इस पर अलग-अलग राय हो सकती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मदुरो पर न्यूयॉर्क में मुकदमा चल रहा है। इसके उलट, पुतिन पर कोई मुकदमा नहीं चल रहा।
जेलेंस्की ने कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा युद्ध है, जो अब चौथे साल में पहुंच चुका है। इसके बावजूद, इस युद्ध को शुरू करने वाला व्यक्ति आज भी आज़ाद है और यूरोप में जमे अपने पैसों को लेकर लड़ रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने चेतावनी दी कि एक वैश्विक ताकत के रूप में यूरोप की भरोसेमंद छवि कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि रूस अब भी उन मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के शहरों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों में किया जा रहा है। ज़ेलेंस्की ने कहा, “यूरोप भविष्य की बातें करना पसंद करता है, लेकिन आज ठोस कदम उठाने से बचता है।” उन्होंने यह भी बताया कि यूरोप ने अब तक रूसी युद्ध अपराधों की जांच के लिए कोई ठोस ट्रिब्यूनल तक नहीं बनाया है।
ज़ेलेंस्की ने रूसी तेल टैंकरों को लेकर यूरोप के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप रूसी “शैडो फ्लीट” के टैंकरों को रोक सकते हैं, लेकिन यूरोप ऐसा क्यों नहीं कर पा रहा। उन्होंने साफ कहा कि तेल से मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को चलाने में इस्तेमाल हो रहा है और यही तेल यूरोप को भी अस्थिर करता है। इसके अलावा ज़ेलेंस्की ने आरोप लगाया कि यूरोप अपने सहयोगियों को नाराज़ न करने पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए सिर्फ 40 सैनिक भेज देने से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा।”पुत