Nepal Flood Update: नेपाल में नेपाल-चीन सीमा के पास आए भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल में इस भीषण त्रासदी की चपेट में आकर 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद अभी 4000 से ज्यादा लोग लापता हैं। इस महा त्रासदी और मानवीय संकट के बीच नेपाल के नए Gen Z एडमिनिस्ट्रेशन और पीएम बालेन शाह (बालेन्द्र शाह) सरकार की आपदा प्रबंधन क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने बालेन शाह सरकार के काम करने के तरीके, धीमी राहत प्रणाली और राजनीतिक परामर्श की कमी को लेकर तीखी आलोचना की है।
स्ट्रेंज पीएम जो संवाद नहीं करते: शासन और धीमी राहत पर उठे सवाल
पूर्व पीएम माधव कुमार नेपाल ने देश के नए Gen Z प्रशासन और बालेन शाह सरकार पर आपदा प्रबंधन व सुशासन की कमियों को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार की धीमी कार्यप्रणाली और राहत कार्यों में हो रही देरी को लेकर लोगों में चिंताएं और शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। खासकर लापता लोगों की तलाश करने और प्रभावितों तक समय पर राहत सामग्री पहुंचाने के मामले में सरकार की स्पीड काफी स्लो है।
माधव नेपाल ने कहा कि, 'यह शिकायत आ रही है कि सरकार कई मोर्चों पर तेजी से कदम नहीं उठा रही है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय सरकार की सबसे पहली और त्वरित प्राथमिकता लापता लोगों को खोजना, घायलों का इलाज सुनिश्चित करना और जरूरत मंदों तक तुरंत राहत पहुंचाना होना चाहिए।
राहत फंड की कोई कमी नहीं, वितरण में रफ्तार का अभाव
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के भीतर राजनीतिक दलों, व्यापारियों, बैंकों, सरकारी कर्मचारियों, संसद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तरफ से राहत कार्यों के लिए भारी योगदान और संसाधन मिले हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन संसाधनों को आपदा प्रभावित समुदायों तक तेजी से पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि राहत कार्य की गति बेहद कम है, इसीलिए हमें बहुत तेजी से काम करने की सख्त जरूरत है।
Gen Z सरकार में प्रशासनिक और कार्यकारी अनुभव की कमी
बालेन शाह सरकार की विफलता और सुस्ती के कारणों पर बात करते हुए माधव नेपाल ने कहा कि नई सरकार के सदस्यों के पास प्रशासनिक और कार्यकारी अनुभव का भारी अभाव है। उन्होंने कहा कि सरकार में शामिल लोग नए हैं, उनके पास काम का वह अनुभव नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय आपदा के समय शासन चलाने के लिए जनता के प्रति पूर्ण समर्पण, प्रेम और स्नेह की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि अनुभवहीनता की वजह ही इस भीषण मानवीय त्रासदी से निपटने में नई सरकार की ओर से बड़ी कमियां देखने को मिल रही हैं।
हाइड्रोपावर टनल में फंसे मजदूर, विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु प्रभावित
नेपाल-चीन सीमा पर आए इस भीषण फ्लैश फ्लड और मलबे ने रिहाइशी बस्तियों, बुनियादी ढांचे और जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। इनमें कई ऐसे मजदूर भी शामिल हैं जो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों के भीतर फंसे हुए माने जा रहे हैं। इस भयंकर प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ वहां मौजूद विदेशी पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और प्रवासी कामगारों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।