अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और फैसलों ने दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। इसमें यूरोप के वे देश भी शामिल हैं, जो अमेरिका के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। इसी वजह से अब कई वैश्विक नेता आपस में बातचीत कर अपने कदमों को मिलाकर चलने की कोशिश कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय नेता आपस में संपर्क में रहने के लिए एक अनौपचारिक ग्रुप चैट का इस्तेमाल कर रहे हैं। जब भी ट्रंप ऐसा कोई बयान या फैसला लेते हैं, जो अजीब या नुकसानदेह लग सकता है, तो ये नेता उसी ग्रुप में मैसेज भेजकर आपस में राय साझा करते हैं। यह जानकारी Politico की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
ट्रंप के खिलाफ बना 'वॉशिंगटन ग्रुप'
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस ग्रुप चैट में कई बड़े यूरोपीय नेता शामिल हैं।इनमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के नेता फ्रेडरिक मर्ज, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी शामिल हैं। यह ग्रुप यूरोप के उन नेताओं का है, जो मौजूदा हालात पर लगातार नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत आपस में चर्चा करते हैं। इसका मकसद यह है कि किसी भी अचानक स्थिति में यूरोप की तरफ से एकजुट और समझदारी भरा जवाब दिया जा सके। इस चैट ग्रुप को “वॉशिंगटन ग्रुप” कहा जाता है। अधिकारी इसे एक अनौपचारिक लेकिन बहुत सक्रिय ग्रुप बताते हैं।
ग्रीनलैंड पर अमेरिका की निगाहें
बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर सख्त रुख दिखाया। ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन आता है। ट्रंप ने संकेत दिए कि अगर कोई देश ग्रीनलैंड पर उनके कदम का विरोध करता है, तो उस पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस बयान से कई यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई। कई यूरोपीय सरकारों के लिए ग्रीनलैंड से जुड़ा यह मामला एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इससे यह डर और गहरा हो गया कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अब पहले जैसा भरोसेमंद सहयोगी नहीं रहा। यूरोप को लगने लगा है कि अमेरिका अपने फैसले अचानक बदल सकता है, जिससे पुराने रिश्तों पर असर पड़ सकता है।
विरोध करने पर ट्रंप ने लगाया टैरिफ
पिछले हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। उनका कहना था कि इन देशों ने अमेरिका के ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध किया है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि जून से इन देशों पर 25 प्रतिशत तक की ड्यूटी लगाई जा सकती है। इस बीच, यूरोप के कई अधिकारी निजी तौर पर इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि ट्रंप ग्रीनलैंड को अपने देश में शामिल करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि ऐसा कदम खतरनाक है और पहले कभी नहीं देखा गया।
जेलेंस्की भी इस ग्रुप चैट का हिस्सा
जानकारी के मुकाबिक, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की भी इस ग्रुप चैट का हिस्सा हैं। क्षेत्र में चल रहे युद्ध की वजह से यह अनौपचारिक चैट और भी ज़्यादा अहम और दिलचस्प हो गई है। इसके अलावा, इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े लोगों का कहना है कि 30 से अधिक देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी आपस में नियमित रूप से संपर्क में हैं। ये बातचीत औपचारिक तरीके से और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग के जरिए होती है। वहीं, यूरोपीय नेताओं ने भी अब ज़्यादा सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है।
ग्रीनलैंड से जुड़े संकट ने यूरोप में इस बहस को और तेज कर दिया है कि सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भरता कैसे कम की जाए। अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि यूरोप अपनी रक्षा खुद कैसे मजबूत कर सकता है। इसी को लेकर यूरोपीय संघ की राजधानी ब्रुसेल्स में यूरोपीय देशों के बीच सैन्य तालमेल बढ़ाने के प्रस्तावों पर तेजी से चर्चा हो रही है। इन योजनाओं का मकसद यह है कि इस दशक के अंत तक यूरोप अपनी सुरक्षा खुद संभालने के काबिल बन सके। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यूरोपीय नेता एक इमरजेंसी समिट करने वाले हैं। इस बैठक में ग्रीनलैंड का मुद्दा, NATO से जुड़े सवाल और व्यापार को लेकर बढ़ता तनाव—तीनों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।