Hantavirus : 70 साल के इस पक्षी वैज्ञानिक के जरिए फैला हंता वायरस! ऐसी कौन सी जगह गए जहां मौजूद थे वो चूहे जिनसे फैला डेडली Virus?

Hantavirus : अटलांटिक महासागर में डच’एमबी हडियस’ (MV Hondius) क्रूज शिप पर फैले हंता वायरस के कहर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। इस वायरस से अब तक तीन लोगों की जान भी जा चुकी है। वहीं इन मौतों के बाद WHO ने चेतावनी भी जारी की थी। कोरोना से भी ज्यादा गंभीर और खतरनाक बताए जा रहे इस वायरस को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है

अपडेटेड May 11, 2026 पर 2:43 PM
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क्रूज शिप पर फैले हंता वायरस के कहर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है।

दुनिया के कई देशों में इस समय जंग के बादल छाए हुए हैं। बीते दो महीनों से अमेरिका और ईरान में जंग जारी है। वहीं दुनिया में छाए इस बारूद के गंध के बीच एक और ही डरावनी खबर सामने आई है। ये खबर एक बार फिर लोगों को पांच साल पहले आए कोरोना वायरस की याद दिला रही है। बता दें कि, अटलांटिक महासागर में डच’एमबी हडियस’ (MV Hondius) क्रूज शिप पर फैले हंता वायरस के कहर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। इस वायरस से अब तक तीन लोगों की जान भी जा चुकी है। वहीं इन मौतों के बाद WHO ने चेतावनी भी जारी की थी। कोरोना से भी ज्यादा गंभीर और खतरनाक बताए जा रहे इस वायरस को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है।

अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, स्वास्थ्य जांच अधिकारियों ने डच पक्षी विशेषज्ञ लियो शिल्परूर्ड को डच’एमबी हडियस’ (MV Hondius) क्रूज शिप पर फैले खतरनाक हंता वायरस का “पहला मरीज” माना है। इस घटना के बाद कई देशों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य निगरानी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, 70 वर्षीय लियो शिल्परूर्ड को हंता वायरस का दुर्लभ एंडीज़ स्ट्रेन दक्षिणी अर्जेंटीना के उशुआइया इलाके के पास हुआ। माना जा रहा है कि वह जहाज पर सवार होने से पहले एक लैंडफिल क्षेत्र के पास बर्डवॉचिंग कर रहे थे, जहां वे वायरस की चपेट में आए। लियो शिल्परूर्ड अपनी पत्नी मिराजम के साथ इस यात्रा पर गए थे।

शिप में 100 से ज्यादा लोग थे मौजूद


बता दें कि, डच’एमबी हडियस’ क्रूज शिप 1 अप्रैल को उशुआइया से 100 से ज्यादा यात्रियों और क्रू सदस्यों को लेकर रवाना हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, 6 अप्रैल को लियो शिल्परूर्ड में बुखार, सिरदर्द और पेट खराब होने जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। 11 अप्रैल को जहाज पर ही उनकी मौत हो गई। बाद में उनकी पत्नी मिराजम उनका शव लेकर सेंट हेलेना में जहाज से उतर गईं। हालांकि, जोहान्सबर्ग में रुकने के दौरान वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं और अगले दिन उनकी भी मौत हो गई। इस वायरस संक्रमण के दौरान एक जर्मन यात्री की भी जान चली गई।

इस दुर्लभ पक्षी को देखने में हुए संक्रमित

स्वास्थ्य अधिकारियों को शक है कि यह कपल उस इलाके में गया था, जहां पक्षी प्रेमी अक्सर दुर्लभ ‘सफेद गले वाले काराकारा’ पक्षी को देखने पहुंचते हैं। अधिकारियों का मानना है कि वहीं पर उनका संपर्क संक्रमित चूहों के मल और पेशाब से हुआ होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस क्षेत्र में लंबी पूंछ वाले छोटे चावल खाने वाले चूहे बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इन्हें एंडीज़ वायरस फैलाने वाला मुख्य जीव माना जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब लोग संक्रमित चूहों के मल या पेशाब से निकले वायरस के कणों को सांस के जरिए अंदर लेते हैं, तो वे इस संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं।

भारत समेत इन देशों में रखी जा रही है निगरानी

‘एंडीज़ वायरस’ या हंता वायरस सीमित स्तर पर एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है। WHO ने इस जहाज से जुड़े कई संदिग्ध और पुष्टि किए गए मामलों की जानकारी दी है। इसके बाद कई देशों ने उन यात्रियों और क्रू सदस्यों की पहचान और जांच शुरू कर दी है। इस वायरस के फैलने के बाद यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों में क्वारंटाइन और स्वास्थ्य निगरानी के कदम शुरू कर दिए गए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी यात्री में वायरस की पुष्टि हुई थी, हालांकि उसमें हल्के लक्षण पाए गए। वहीं, एक दूसरे यात्री में क्रूज़ यात्रा से लौटने के बाद बीमारी के लक्षण दिखाई दिए। सिंगापुर और भारत के स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी इस जहाज से जुड़े यात्रियों और क्रू सदस्यों पर निगरानी शुरू कर दी है। हालांकि बढ़ती चिंता के बीच वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि आम लोगों के लिए फिलहाल खतरा कम है। अर्जेंटीना के जांच अधिकारी अब भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि संक्रमण की शुरुआत कैसे हुई और क्या इस क्रूज़ जहाज से जुड़े और मामले सामने आ सकते हैं।

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