समंदर में खड़ा जहाज और इसमें जानलेवा हंता वायरस से जूझ रहे 23 देशों के 150 लोग, एक डेड बॉडी भी इसी पर! हॉरर स्टोरी LIVE
Hantavirus Outbreak: अब तक जांच में जहाज से जुड़े हंता वायरस के सिर्फ दो मामलों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को शक है कि बाकी बीमार लोग भी इसी वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। इसी वजह से इस पूरे मामले को संभावित प्रकोप के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संक्रमण आखिर शुरू कहां से हुआ और यह जहाज तक कैसे पहुंचा
अटलांटिक महासागर के रास्ते लंबी यात्रा पर निकले एक क्रूज जहाज में हंटावायरस संक्रमण का मामला सामने आया है। (प्रतिकात्मक तस्वीर)
कोरोना महामारी के बीते हुए पांच साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, पर आज भी वो लोगों के यादों में बुरे सपने के जैसा है। इस महामारी में दुनिया भर में लाखों लोगों की जान गई थी। वहीं कोरोना महामारी का दौर भले ही बीत चुका है पर इस समय दुनिया में एक और वायरस ने एंट्री हो चुकी है। इस बार वायरस किसी देश में नहीं बल्कि समुद्र में मौजूद एक जहाज मे मिला है। बता दें कि, अर्जेंटीना से अंटार्कटिका और फिर अटलांटिक महासागर के रास्ते लंबी यात्रा पर निकले एक क्रूज जहाज में हंता वायरस संक्रमण का मामला सामने आया है। यह जहाज कई हफ्तों से समुद्र में सफर कर रहा था।
अब तक तीन यात्रियों की हो चुकी है मौत
क्रूज कंपनी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और जहाज ट्रैकिंग से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ यात्रियों और क्रू मेंबरों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। इसके बाद जहाज को रास्ते में दूर-दराज के कुछ द्वीपों के पास रोकना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र में एक 70 वर्षीय डच यात्री बीमार पड़ गया था, जिसकी बाद में मौत हो गई। इसके करीब एक महीने बाद दक्षिण अफ्रीका की एक लैब में जांच के दौरान हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। जहाज उस समय दक्षिण अफ्रीका से करीब 3,500 किलोमीटर दूर समुद्र में मौजूद था। अब तक इस क्रूज जहाज से जुड़े तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है। वहीं, एक यात्री दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। इसके अलावा जहाज पर मौजूद तीन और यात्रियों में भी बीमारी के लक्षण पाए गए हैं और उन्हें बाहर निकालने की तैयारी चल रही है।
जहाज पर 23 देशों के 150 यात्री हैं सवार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जहाज पर 23 देशों के करीब 150 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे। फिलहाल यह जहाज पश्चिमी अफ्रीका के तट के पास खड़ा है। हंटावायरस कोई एक वायरस नहीं है, बल्कि यह कई वायरसों का एक समूह है। ये वायरस हंता वायरस परिवार से जुड़े होते हैं और आमतौर पर चूहों जैसे कृंतक जीवों के जरिए इंसानों तक फैलते हैं। संक्रमित चूहों की लार, पेशाब या मल के संपर्क में आने से इंसान इस वायरस की चपेट में आ सकते हैं। आमतौर पर हंटावायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता, लेकिन कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मामलों में ऐसा होना संभव हो सकता है।
अब तक जांच में जहाज से जुड़े हंता वायरस के सिर्फ दो मामलों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को शक है कि बाकी बीमार लोग भी इसी वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। इसी वजह से इस पूरे मामले को संभावित प्रकोप के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संक्रमण आखिर शुरू कहां से हुआ और यह जहाज तक कैसे पहुंचा।
जहाज पर क्या हुआ?
बता दें कि, MV होंडियस नाम का यह क्रूज जहाज एक डच कंपनी द्वारा संचालित किया जाता है, जो अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक के दूर-दराज के द्वीपों की खास यात्राएं कराती है। इन यात्राओं के जरिए लोग दुनिया की सबसे अलग और मुश्किल पहुंच वाली जगहों तक जा सकते हैं। इन क्रूज यात्राओं की समय आमतौर पर एक महीने या उससे ज्यादा होती है। जहाज में केबिन की सुविधा के हिसाब से टिकट की कीमत लगभग 6,000 डॉलर (करीब 5.7 लाख रुपये) से लेकर 25,000 डॉलर (करीब 23.8 लाख रुपये) तक हो सकती है। MV होंडियस 1 अप्रैल को दक्षिणी अर्जेंटीना से रवाना हुआ था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 6 अप्रैल को जहाज पर मौजूद 70 वर्षीय एक डच यात्री को बुखार, सिरदर्द और हल्के दस्त की शिकायत हुई।
पति के बाद पत्नी की भी हुई मौत
11 अप्रैल को उस यात्री को सांस लेने में काफी दिक्कत होने लगी, जिसके बाद जहाज पर ही उनकी मौत हो गई। जहाज ट्रैकिंग वेबसाइट MarineTraffic के अनुसार, उस समय जहाज दक्षिण अटलांटिक महासागर के बीच में था और ब्रिटेन के द्वीपीय क्षेत्रों साउथ जॉर्जिया और सेंट हेलेना के बीच सफर कर रहा था। क्रूज कंपनी Oceanwide Expeditions का कहना है कि उस समय मौत की असली वजह पता नहीं चल सकी थी। इसके बाद जहाज करीब दो हफ्तों तक यात्रा करता रहा। सेंट हेलेना पहुंचने से पहले यह Tristan da Cunha द्वीप के पास रुका, जहां 24 अप्रैल को मृत यात्री का शव जहाज से उतारा गया। उनकी 69 वर्षीय पत्नी भी शव के साथ जहाज से उतरीं और बाद में दक्षिण अफ्रीका चली गईं, जबकि शव वहीं रखा गया। महिला में पहले से ही बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे थे। 25 अप्रैल को दक्षिण अफ्रीका की फ्लाइट के दौरान उनकी हालत और बिगड़ गई और एयरपोर्ट पर वह अचानक गिर पड़ीं। WHO के मुताबिक, 26 अप्रैल को अस्पताल में उनकी भी मौत हो गई।
मौत से पहले महिला में दिखाई दिए थे ये लक्षण
उस महिला में पहले से ही बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे थे। 25 अप्रैल को दक्षिण अफ्रीका जाने वाली फ्लाइट के दौरान उनकी हालत और खराब हो गई और एयरपोर्ट पर वह अचानक गिर पड़ीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 26 अप्रैल को अस्पताल में उनकी मौत हो गई। तीसरी मौत एक जर्मन महिला की हुई। शनिवार को जहाज़ पर ही उनकी जान चली गई, जब जहाज अपनी अगली मंजिल Cape Verde की ओर बढ़ रहा था। WHO ने बताया कि महिला की तबीयत बिगड़ने के चार दिन बाद उसकी मौत हुई। उसमें निमोनिया जैसे लक्षण भी दिखाई दिए थे, जो हंटावायरस संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल उसका शव अभी भी जहाज पर मौजूद है।
जहाज पर हंटावायरस के बारे में ऐसे मिली जानकारी
दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने उस ब्रिटिश यात्री का हंटावायरस टेस्ट तब कराया, जब उसके बाकी सभी मेडिकल टेस्ट नेगेटिव आए। वह व्यक्ति अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती था। शनिवार को उसकी रिपोर्ट हंटावायरस पॉजिटिव आई। यह पहले यात्री की मौत के करीब 21 दिन बाद हुआ। इसके अगले दिन यानी रविवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि वह जहाज़ पर हंटावायरस के संभावित प्रकोप की जांच कर रहा है। उस समय तक जहाज Cape Verde के समुद्री इलाके में पहुंच चुका था। ब्रिटिश यात्री की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मृत डच महिला के शव का भी हंटावायरस टेस्ट किया। सोमवार को उसकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई।
WHO ने कहा कि जहाज पर फैले इस संक्रमण को फिलहाल नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है और इससे दुनिया भर में बड़ा खतरा होने की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि हंटावायरस आमतौर पर इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता। हालांकि, WHO उन यात्रियों की पहचान करने में जुटा है, जो डच महिला के साथ सेंट हेलेना से जोहान्सबर्ग जाने वाली फ्लाइट में सफर कर रहे थे।
जहाज पर मौजूद लोगों के लिए क्या है प्लान?
Oceanwide Expeditions ने मंगलवार को बताया कि जिन दो लोगों को तुरंत इलाज की जरूरत थी और एक यात्री, जो शनिवार को मृत हुई जर्मन महिला के साथ यात्रा कर रहा था, उन्हें जहाज़ से निकालने के लिए विमान Cape Verde भेजे गए हैं। इन लोगों को इलाज के लिए नीदरलैंड ले जाने की तैयारी की गई थी, हालांकि उनके पहुंचने का सही समय अभी तय नहीं था। कंपनी के मुताबिक, इसके बाद जहाज स्पेन के Canary Islands की ओर रवाना होगा। इस यात्रा में करीब तीन दिन लग सकते हैं। स्पेन के अधिकारियों ने कहा है कि वे पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन मंगलवार शाम तक उन्होंने किसी खास योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहाज पर मौजूद यात्रियों और क्रू सदस्यों को उनके केबिन में अलग रखा गया है। वहां अधिकतम शारीरिक दूरी बनाए रखने के नियम लागू किए गए हैं। यह स्थिति काफी हद तक Covid-19 महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन जैसी दिखाई दे रही है।
जहाज तक कैसे पहुंचा वायरस?
WHO अभी भी यह पता लगाने में जुटा है कि यह वायरस जहाज तक कैसे पहुंचा। हंटावायरस आमतौर पर इंसानों में बहुत कम देखने को मिलता है। जांच में सामने आया है कि डच व्यक्ति और उनकी पत्नी, जिन्हें पहला और दूसरा संक्रमित मामला माना गया है, जहाज़ पर सवार होने से पहले अर्जेंटीना और साउथ अमेरिका के दूसरे इलाकों में घूम चुके थे। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, Andes वायरस साउथ अमेरिका में पहले से पाया जाता है। ये हंटावायरस का ही एक प्रकार है। यह खास तौर पर आर्जेंटीना और चिली में ज्यादा देखा जाता है।