बांग्लादेश में देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद हिंदू संत और सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की मां का गुरुवार सुबह निधन हो गया। अपनी आखिरी सांसें गिन रहीं बीमार मां और जेल में बंद बेटे को उनके अंतिम समय में मिलाने की परिवार की तमाम कोशिशें अधूरी रह गईं क्योंकि अधिकारियों से पैरोल की मंजूरी मां के देहांत के बाद ही मिल सकी।
कैंसर से पीड़ित थीं 72 वर्षीय संध्या रानी धर
बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो के मुताबिक 72 साल की संध्या रानी धर लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थीं और चटगांव मां-ओ-शिशु अस्पताल में उनका कैंसर का इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उन्हें बुधवार रात चटगांव के हथजारी स्थित पुंडरीक धाम ले जाया गया, जहां गुरुवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
मां के निधन के बाद मिली 5 घंटे की पैरोल
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मां की बिगड़ती हालत को देखते हुए परिवार ने बुधवार को ही चिन्मय कृष्ण दास की पैरोल के लिए आवेदन किया था ताकि वे अपनी गंभीर रूप से बीमार मां से मिल सकें। हालांकि प्रशासन की ओर से पैरोल की मंजूरी मां के निधन के बाद ही जारी की गई। चटगांव के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सैयद महबूबुल हक ने चिन्मय कृष्ण दास को उनकी मां के दाह संस्कार में शामिल होने के लिए 5 घंटे की रिहाई का आदेश दिया है। चटगांव के उपायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मिया ने बताया कि परिवार के आवेदन के बाद प्रशासन ने आवश्यक कानूनी कदम उठाए और 5 घंटे की पैरोल स्वीकृत की। चटगांव सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक इकबाल हुसैन ने पुष्टि की कि आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद चिन्मय को शाम 4 बजे जेल से रिहा किया गया।
नवंबर 2024 से जेल में बंद हैं चिन्मय कृष्ण दास
चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका से गिरफ्तार किया गया था और वे तब से ही हिरासत में हैं। उन पर 31 अक्टूबर 2024 को देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। यह मामला चटगांव के चांदगांव-मोहरा वार्ड से बीएनपी (BNP) के तत्कालीन महासचिव फिरोज खान ने चिन्मय और 18 दूसरे लोगों के खिलाफ बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के आरोप में दर्ज कराया था। हालांकि बाद में फिरोज खान को उनके बीएनपी पद से हटा दिया गया था।
जमानत सुनवाई के दौरान हुई थी हिंसा
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद चटगांव में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान व्यापक हिंसा और झड़पें हुई थीं। 26 नवंबर 2024 को जमानत की कार्यवाही के दौरान हुई हिंसा में वकील सैफ उल इस्लाम की पीट-पीटकर और धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद सैफ उल के पिता जमाल उद्दीन ने इस हत्या के संबंध में 31 लोगों को नामजद करते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।