Pak-Taliban Tension: 'अगर युद्ध हुआ तो सिंध और पंजाब दूर नहीं...', शांति वार्ता विफल होने के बाद तालिबान ने पाकिस्तान को दी चेतावनी

Pakistan-Afghanistan: अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर इस्तांबुल वार्ता के दौरान 'गैर-जिम्मेदाराना और असहयोगी' दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाया। तालिबान का दावा है कि इस्लामाबाद 'सभी सुरक्षा जिम्मेदारी' का बोझ काबुल पर डालना चाहता था, जबकि अपनी खुद की कार्रवाई की जवाबदेही से बचना चाहता था

अपडेटेड Nov 09, 2025 पर 8:23 AM
तालिबानी नेता नूरी ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को 'अपने देश की टेक्नोलॉजी पर अत्यधिक आत्मविश्वास न रखने' की चेतावनी दी

Pak-Taliban Tension: इस्तांबुल में 6 और 7 नवंबर को हुई पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी। अब तालिबानी प्रशासन ने पाकिस्तान को 'अपने सब्र की परीक्षा न लेने' की कड़ी चेतावनी दी है। तुर्की और कतर की मध्यस्थता में हुई यह बातचीत, सीमा पार हमलों के लिए अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल करने के आरोपी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने की लिखित प्रतिबद्धता हासिल करने में विफल रही। वार्ता खत्म होने के बाद अफगानिस्तान के जनजातीय, सीमा और जनजातीय मामलों के मंत्री नूरुल्लाह नूरी ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वे अफगानों के संकल्प का परीक्षण न करें।

'सिंध और पंजाब दूर नहीं': नूरी की तीखी चेतावनी

TOLO News के अनुसार, मंत्री नूरुल्लाह नूरी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि युद्ध छिड़ता है, तो 'अफगानिस्तान के बुजुर्ग और युवा लड़ने के लिए उठ खड़े होंगे।' नूरी ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को 'अपने देश की टेक्नोलॉजी पर अत्यधिक आत्मविश्वास न रखने' की चेतावनी दी और उनसे अफगानिस्तान में संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के अनुभवों से सीखने का आग्रह किया। उन्होंने पाकिस्तान को धमकी दी कि यदि तनाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत 'दूर नहीं' हैं।


पाक सेना के 'जंगबाज गुटों' ने वार्ता को किया नाकाम

तालिबान के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि पाकिस्तान सेना के कुछ गुट अफगानिस्तान की बढ़ती स्थिरता और प्रगति से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'इन समूहों को ऐतिहासिक रूप से अफगानिस्तान की असुरक्षा, कब्जे, प्रवास और संकटों से फायदा हुआ है। वे अब नए बहाने गढ़कर अफगानिस्तान के साथ टकराव में फिर से शामिल होना चाहते हैं।' मुजाहिद ने आरोप लगाया कि इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद और TTP के बीच बातचीत की सुविधा प्रदान की थी, जिससे दीर्घकालिक युद्धविराम और महत्वपूर्ण प्रगति हुई, लेकिन बाद में 'पाकिस्तान सेना के कुछ गुटों द्वारा इस प्रक्रिया में तोड़फोड़ की गई।'

मुजाहिद ने यह भी स्पष्ट किया कि TTP का मुद्दा 2002 से चला आ रहा है, जिसकी जड़ें पाकिस्तानी सेना के उन गुटों की 'भ्रमित नीतियों' में हैं जिन्होंने अमेरिका के साथ सहयोग किया और वज़ीरिस्तान में ड्रोन हमलों की अनुमति दी।

तालिबान का 'गैर-सहकारी' दृष्टिकोण का आरोप

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर इस्तांबुल वार्ता के दौरान 'गैर-जिम्मेदाराना और असहयोगी' दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाया। तालिबान का दावा है कि इस्लामाबाद 'सभी सुरक्षा जिम्मेदारी' का बोझ काबुल पर डालना चाहता था, जबकि अपनी खुद की कार्रवाई की जवाबदेही से बचना चाहता था।

तालिबान ने दोहराया है कि वह अपनी धरती को किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा, न ही अपनी संप्रभुता के उल्लंघन की अनुमति देगा। मुजाहिद ने बयान में 'अल्लाह की मदद और अपने लोगों के समर्थन से किसी भी आक्रमण के खिलाफ दृढ़ता से बचाव' करने की कसम खाई।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बाद में स्वीकार किया कि इस्तांबुल वार्ता 'बिना किसी नतीजे के एक अनिश्चित चरण में पहुंच गई है' और पुष्टि की कि 'चौथे दौर की कोई योजना अभी नहीं है।' अक्टूबर में घातक सीमा झड़पों के बाद तनाव को हल करने का यह तीसरा असफल प्रयास है।

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