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नेपाल संग ये रिश्ता 200 साल पुराना पर अग्निपथ के बाद लगा ब्रेक! अब गोरखाओं की भर्ती पर क्या करने वाले हैं बालेन शाह

India-Nepal Relations: भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के बीच नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिकों ने प्रधानमंत्री बालेंद्र बालेन शाह की सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। इनकी मांग है कि भारत सरकार की अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती को लेकर बने गतिरोध को खत्म किया जाए

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Aug 19, 2026 पर 12:33 PM
नेपाल संग ये रिश्ता 200 साल पुराना पर अग्निपथ के बाद लगा ब्रेक! अब गोरखाओं की भर्ती पर क्या करने वाले हैं बालेन शाह
India-Nepal Relations: भारत और नेपाल के बीच का ऐतिहासिक रिश्ता एक बार फिर चर्चा में है

भारतीय सेना और नेपाल के गोरखा सैनिकों के बीच का ऐतिहासिक रिश्ता एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के बीच नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिकों ने प्रधानमंत्री बालेंद्र बालेन शाह की सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। इनकी मांग है कि भारत सरकार की अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती को लेकर बने गतिरोध को खत्म किया जाए। हमारी सहयोगी वेबसाइट News18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस भर्ती विवाद ने भारत-नेपाल के सैन्य और राजनयिक संबंधों के बीच एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जिसपर रस्साकस्सी जारी है।

आपको बता दें कि जनरल धीरज सेठ ने अपनी तीन दिवसीय नेपाल यात्रा के दौरान पोखरा में आयोजित गोरखा भूतपूर्व सैनिक रैली में भी शामिल हो रहे हैं। पोखरा में हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान गोरखा दिग्गजों ने सीधे तौर पर कहा था कि खाड़ी देशों में जाकर काम करने से भारतीय सेना में अग्निवीर बनना कहीं बेहतर है। अपने नागरिकों और पूर्व सैनिकों का यह तर्क और दबाव नेपाल सरकार के सामने एक बड़ी दुविधा खड़ा करता नजर आ रहा है।

200 साल पुराना है गोरखाओं और भारतीय सेना का रिश्ता

इस विवाद को समझने से पहले हमें इतिसाह में भी झांकने की आवश्यकता है। आपको बता दें कि भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती का इतिहास 200 साल से भी अधिक पुराना है। ब्रिटिश काल में 1814-16 के एंग्लो-नेपाली युद्ध के बाद गोरखाओं की बहादुरी से प्रभावित होकर उनकी भर्ती शुरू की गई थी। साल 1947 में भारत की आजादी के समय भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था।

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