पश्चिम एशिया से इस समय की एक बहुत बड़ी और बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच इस समय चल रहे बेहद नाजुक सीजफायर के भी टूटने का खतरा खड़ा हो गया है। असल में ऐसी जानकारी मिल रही है कि ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी है जिससे इलाके में तनाव फैल गया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के इस हमले की कोशिश की पुष्टि की है।
ईरान की इस आक्रामक कार्रवाई के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर टूटने वाला है?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को जानकारी दी कि ईरान ने कुवैत की तरफ एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी. दावे के मुताबिक इस मिसाइल को कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही सफलतापूर्वक मार गिराया और उसे इंटरसेप्ट कर लिया. सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह मिसाइल अमेरिकी समयानुसार (ET) रात 10:17 बजे लॉन्च की गई थी। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाजुक समय में युद्ध को खत्म करने के लिए समझौते तक पहुंचने की बात कुछ घंटों पहले ही दोहराई थी। इसके तुरंत बाद ईरान द्वारा मिसाइल दागे जाने की इस घटना ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में हमलों के सिलसिले को और तेज कर दिया है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास अमेरिकी हमलों से भड़का तनाव
आपको बता दें कि इस ताजा तनाव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास स्थित एक ईरानी ठिकाने पर हमले किए। वॉशिंगटन का दावा था कि इस ठिकाने से अमेरिकी सेना और कमर्शियल शिपिंग ट्रैफिक के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया था। इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। ईरान ने एक अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया और दावा किया कि इसी एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिका ने ईरान पर पहले हमले करने के लिए ओरिजिन पॉइंट के रूप में किया था।
CENTCOM ने कहा- सीजफायर का घोर उल्लंघन, दागे थे 5 ड्रोन
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान की इस कार्रवाई को सीजफायर समझौते का घोर उल्लंघन करार दिया है। CENTCOM ने कहा कि ईरानी शासन द्वारा सीजफायर का यह घोर उल्लंघन उस घटना के कुछ ही घंटों बाद हुआ, जब ईरानी सेना ने पांच वन-वे अटैक ड्रोन (आत्मघाती ड्रोन) लॉन्च किए थे। अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि ईरान के सभी पांचों वन-वे अटैक ड्रोनों को हवा में ही इंटरसेप्ट (नष्ट) कर दिया। ईरान के बंदर अब्बास स्थित एक ग्राउंड कंट्रोल साइट से छठे ड्रोन को लॉन्च करने के प्रयास को भी अमेरिका ने एक टारगेटेड स्ट्राइक के जरिए नाकाम कर दिया।
कुवैत को निशाना बनाना क्यों है बेहद गंभीर?
ईरान द्वारा दागी गई मिसाइल का निशाना कुवैत था। मध्य पूर्व में कुवैत की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वह इस क्षेत्र में अमेरिका का एक प्रमुख भागीदार है। कुवैत में कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयर बेस सहित कई सैन्य ठिकानों पर हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यही वजह है कि अमेरिकी सेना ने इस मिसाइल लॉन्च की कड़ी निंदा की है और ईरान पर खाड़ी में एक करीबी अमेरिकी सहयोगी को सीधे निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
खाड़ी में 'जैसे को तैसा' वाले हमलों का सिलसिला तेज
पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच लगातार जैसे को तैसा की तर्ज पर हमले किए जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले बताया था कि उनकी सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइटों और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नावों पर अपनी सुरक्षा के लिए हमले किए थे। ईरान के सरकारी मीडिया ने बाद में IRGC द्वारा जवाबी कार्रवाई की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने अमेरिकी हमलों के जवाब में क्षेत्र में एक अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाया है।
तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अतिरिक्त समुद्री गतिविधियों की भी सूचना दी है। इसमें उन जहाजों को रोकना शामिल है जो फारस की खाड़ी में बिना समन्वय के काम कर रहे थे। हालांकि ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
सक्रिय राजनयिक प्रयासों के बीच बढ़ता खतरा
वॉशिंगटन की ओर से तनाव कम करने और सीजफायर को बनाए रखने के लिए लगातार राजनयिक प्रयास किए जा रहे हैं और राजनयिक चैनल सक्रिय हैं। इसके बावजूद दोनों तरफ से हो रहे लगातार पलटवार और हमलों के सिलसिले ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर सीजफायर के प्रयास बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच चुके हैं। CENTCOM ने दोहराया है कि खाड़ी के इन महत्वपूर्ण और संवेदनशील शिपिंग कॉरिडोर में तनाव लगातार बरकरार है और अमेरिकी सेना अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ हाई अलर्ट पर है।