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क्या ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले से अमेरिका का मकसद पूरा हो गया है या अभी बहुत कुछ होना बाकी है?

अमेरिका का खुलकर इजराइल के समर्थन में आ जाने और ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के लिए अपने सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करना चौंकाता है। ईरान-इजरायल के बीच युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने बार-बार यह कहा था कि उसका इसमें कोई हाथ नहीं है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jun 23, 2025 पर 1:21 PM
क्या ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले से अमेरिका का मकसद पूरा हो गया है या अभी बहुत कुछ होना बाकी है?
मध्यपूर्व देशों की बात की जाए तो इसके कई देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत ने अमेरिका में भारी निवेश किया है।

लोग सबसे ज्यादा सवाल यह पूछ रहे हैं कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के बम गिराने उन पर और उनके देश पर क्या असर पड़ेगा। क्या इससे बड़ा बदलाव आएगा जैसे जहाजों के आनेजाने का रास्ता बदल जाएगा, क्रूड की कीमतें बढ़ जाए और शक्ति का संतुलन बदल जाएग?

ईरान ने बदले की कार्रवाई की धमकी दी है। उधर, ईरान के संसद ने हॉर्मुज की खाड़ी को बंद करने के प्रस्ताव पारित किया है। यह 33 किलोमीटर चौड़ा एक गलियार है, जिसका इस्तेमाल ऑयल की 20 फीसदी ग्लोबल सप्लाई के लिए होता है। हालांकि, इस गलियारे को बंद करने के अंतिम फैसला ईरान की सुप्रीम काउंसिल को लेना है, जिसके प्रमुख अयातुल्ला खामेनेई है। इसे सबसे पावरफुल माना जाता है।

हॉर्मुज के बारे में पूछने पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के पास कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया। लेकिन, खबरों में कहा जा रहा है कि ईरान इस गलियारे के इस्तेमाल से जहाजों को रोकने के लिए हाई-स्पीड बोट्स का इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा, यमन के हूतियों ने लाल सागर के बंदरगाहों के इस्तेमाल में भी बाधा पैदा करने की धमकी दी है।

अगर इस गलियारे को बंद किया जाता है तो चीन जैसे ईरान के दोस्त देशों और ट्रेड पार्टनर्स को भी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि ये देश काफी हद तक इस गलियारे के इस्तेमाल पर निर्भर हैं। इस बीच, अमेरिकी विदेशमंत्री मार्को रूबियो ने चीन से अपील की है कि वह ईरान को इस गलियारे को बंद नहीं करने के लिए कहे।

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