इजरायल के खिलाफ ईरान ने अब लॉन्च किया 'ऑपरेशन नस्र', इस डेडली Operation की 40 साल पुरानी कहानी क्या है?

Iran-US War News: ईरान ने अपने इस ऑपरेशन का नाम करीब 40 साल पहले हुए ईरान-इराक युद्ध के दौरान चलाए गए एक प्रमुख सैन्य ऑपरेशन के नाम पर रखा गया है। IRGC के अनुसार, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नेवातिम एयर बेस और तेल नोफ एयर बेस पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 2:53 PM
Iran-US War News: मिडिल ईस्ट में जंग की आग फिर धधक उठी है।

Iran-US War News: मिडिल ईस्ट में जंग की आग फिर धधक उठी है। युद्ध की आग शांत होने की बजाय भड़कती दिख रही है। हिज्बुल्लाह पर इजरायल के हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरु कर दी है। इससे पहले सोमवार की सुबह इजरायल ने भी ईरान में जमीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं। वहीं ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को "ऑपरेशन नस्र" शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत इज़राइल के दो महत्वपूर्ण एयरफोर्स बेस पर मिसाइल हमले किए गए।

ईरान ने शुरू किया  'ऑपरेशन नस्र'

ईरान ने अपने इस ऑपरेशन का नाम करीब 40 साल पहले हुए ईरान-इराक युद्ध के दौरान चलाए गए एक प्रमुख सैन्य ऑपरेशन के नाम पर रखा गया है। IRGC के अनुसार, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नेवातिम एयर बेस और तेल नोफ एयर बेस पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई उसके देश में स्थित रडार केंद्रों पर हाल ही में हुए इज़राइली मिसाइल हमलों के जवाब में की गई है।


इजरायल के दो एयरबेस पर किया हमला 

ईरान के सरकारी मीडिया में जारी एक बयान में रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने बताया कि "ऑपरेशन नस्र" को "या हैदर कर्रार" कोड नाम के साथ शुरू किया गया। इस अभियान को हाल ही में 12 दिनों तक चले ईरान-इजराइल संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों की याद में समर्पित किया गया है। बयान में कहा गया कि, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स के जवानों ने तेल नोफ एयर बेस और नेवातिम एयर बेस पर मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन नस्र की शुरुआत की। गार्ड्स ने दावा किया कि इस कार्रवाई में रणनीतिक रूप से अहम टारगेट को निशाना बनाया गया।

IRGC ने कहा कि यह हमला ईरान के भीतर तीन अलग-अलग रडार सेंटर पर हुए इजरायली हमलों के जवाब में किया गया है। संगठन ने चेतावनी भी दी कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो उसकी सभी सैन्य और ऑपरेशनल इकाइयां बड़े स्तर की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगी। बयान में कहा गया कि जवाबी कार्रवाई की तेजी और निशाने के लिए चुने गए लक्ष्यों का दायरा इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत है। IRGC ने यह भी दावा किया कि हालात के अनुसार बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की योजनाएं पहले से तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें लागू किया जा सकता है।

फिर भड़की जंग की आग

अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद यह मिसाइल हमला दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा तनाव माना जा रहा है। उस सीजफायर ने ईरान और इजरायल के बीच कई हफ्तों से जारी संघर्ष को रोक दिया था। इज़रायली अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार को ईरान ने इजरायल की ओर दो फेज में मिसाइलें दागीं। वहीं, ईरान ने आरोप लगाया कि इजरायल ने उसके सैन्य और औद्योगिक ठिकानों पर नए हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि इन हमलों में दक्षिण-पश्चिमी प्रांत खुज़ेस्तान में स्थित एक पेट्रोकेमिकल परिसर को भी निशाना बनाया गया।

'ऑपरेशन नस्र' नाम क्यों चुना गया?

ईरान ने इस जवाबी कार्रवाई के लिए 'ऑपरेशन नस्र' नाम इसलिए चुना है क्योंकि इसका उसके सैन्य इतिहास में खास महत्व है। असल ऑपरेशन नस्र 5 जनवरी 1981 को ईरान-इराक युद्ध के शुरुआती दिनों में शुरू किया गया था। उस समय इसका उद्देश्य ईरान के तेल-समृद्ध खुज़ेस्तान प्रांत में सुसांगेर्द और होवेज़ेह क्षेत्रों के आसपास मौजूद इराकी सैन्य ठिकानों पर हमला करना था। यह कार्रवाई उस दौर में की गई थी, जब 1980 में सद्दाम हुसैन की सेना ने ईरान के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने की कोशिश की थी। इसलिए आज फिर से "ऑपरेशन नस्र" नाम का इस्तेमाल कर ईरान अपने पुराने सैन्य इतिहास और संघर्ष की याद को दोहरा रहा है।

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