तनाव के बीच अमेरिका के तेवर ने ईरान को बैकफुट पर धकेल दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और इस समुद्री रास्ते को लेकर युद्ध जैसी आशंकाएं जताई जा रही थीं। वहीं यह भी खबर आई है कि दोनों देश बातचीत के लिए तैयार हैं। स्थानीय मीडिया ने सोमवार को एक अज्ञात सरकारी सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान और अमेरिका परमाणु मुद्दे पर बातचीत करेंगे, हालांकि बातचीत कब शुरू होगी, इसकी तारीख नहीं बताई गई है। यह खबर ईरान के सरकारी अखबार ईरान और शार्ग में भी छपी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो इससे पूरे इलाके में युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।
समझौते का मन बना रहे दोनों देश
ईरान के नेता की चेतावनी पर सवाल पूछे जाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौता नहीं होता है, तो तब यह साफ हो जाएगा कि ईरानी नेता की बात सही थी या नहीं। दिसंबर के आखिर में शुरू हुए और पिछले महीने तक चले सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ईरान में हुई सख्त कार्रवाई के बाद ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इस दौरान ट्रंप ने कई बार सैन्य कार्रवाई की धमकी दी और मध्य पूर्व में एक विमानवाहक पोत समूह भेजने का आदेश भी दिया था। इससे पहले आज, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ तनाव कम करने के लिए अलग-अलग कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में इस दिशा में कुछ नतीजे सामने आ सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि क्षेत्र के कुछ देश ईरान और अमेरिका के बीच भेजे जा रहे संदेशों में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई है और फिलहाल हर कूटनीतिक प्रक्रिया के पहलुओं की जांच की जा रही है। बगाई ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में इसके नतीजे सामने आ सकते हैं। ईरान में ये विरोध प्रदर्शन पहले महंगाई के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन बाद में ये एक बड़े सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनों को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा भड़काए गए “दंगे” बताया है।
अधिकारियों ने माना है कि इस अशांति के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई है। रविवार को राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि 3,117 मौतों की रिपोर्ट में से 2,986 लोगों के नामों की सूची जारी कर दी गई है। बाकी 131 लोगों की पहचान अभी नहीं हो पाई है, लेकिन उनकी जानकारी जल्द जारी की जाएगी। वहीं, अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार समाचार एजेंसी का दावा है कि इन घटनाओं में 6,842 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से ज़्यादातर प्रदर्शनकारी थे।