'हमारी शर्तों पर ही खत्म होगी जंग'... ईरान ने ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकराया, अमेरिका के सामने रखी 5 बड़ी मांगें

ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए साफ कहा है कि युद्ध उसकी शर्तों पर ही खत्म होगा। ईरान ने जंग रोकने के लिए अमेरिका के सामने 5 बड़ी मांगें रखी हैं। इनमें युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई भी शामिल है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 25, 2026 पर 11:01 PM
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ईरान युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा चाहता है।

ईरान ने चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा शांति प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। ईरान का कहना है कि युद्ध का अंत सिर्फ उसकी अपनी शर्तों पर ही होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर से तनाव कम करने का दबाव बढ़ रहा है। तेल बाजार में उथल पुथल, क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ती मौतों के बीच अमेरिका बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि ईरान इस प्रस्ताव को शांति की सच्ची कोशिश नहीं मानता। उसका कहना है कि यह ढांचा दबाव और पुराने अनुभवों से प्रभावित है। इसी वजह से ईरान का रुख अब और सख्त हो गया है। इसमें अविश्वास, रणनीतिक दबाव और कुछ साफ शर्तें शामिल हैं।

ईरान का साफ रुख


ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने Press TV से बातचीत में कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला ईरान खुद करेगा। उन्होंने कहा, 'ईरान युद्ध तब खत्म करेगा जब वह खुद चाहेगा और जब उसकी शर्तें पूरी होंगी।'

अधिकारी ने अमेरिकी प्रस्ताव को 'हद से ज्यादा' बताया। उनका कहना है कि यह ढांचा अमेरिका के रणनीतिक हितों को ज्यादा फायदा पहुंचाता है। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारी के मुताबिक जब तक शर्तें पूरी नहीं होतीं, ईरान अपनी रक्षा जारी रखेगा और विरोधियों को 'कड़ा जवाब' देगा।

भरोसे की कमी बड़ी वजह

ईरान का यह फैसला सिर्फ मौजूदा मतभेदों की वजह से नहीं है, बल्कि पुराने अनुभवों से भी जुड़ा है।

अधिकारी के मुताबिक, पहले भी दो बार अमेरिका के साथ बातचीत के बाद सैन्य कार्रवाई हुई थी। इससे ईरान को लगता है कि अमेरिका असली बातचीत के बजाय रणनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करता है। इसी वजह से ईरान ने ताजा प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया।

युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की 5 शर्तें

अमेरिकी प्रस्ताव को मानने के बजाय ईरान ने पांच स्पष्ट शर्तें रखी हैं, जिनके आधार पर वह युद्ध खत्म करने पर विचार कर सकता है।

  • पहली शर्त यह है कि अमेरिका और इजराइल की सभी सैन्य कार्रवाइयां पूरी तरह बंद हों।
  • दूसरी शर्त है कि भविष्य में दोबारा हमला न हो, इसके लिए ठोस और बाध्यकारी सुरक्षा गारंटी दी जाए।
  • तीसरी शर्त के तहत ईरान युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा चाहता है।
  • चौथी शर्त यह है कि पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर संघर्ष बंद हो, जिसमें सहयोगी प्रतिरोधी समूहों की गतिविधियां भी शामिल हैं।
  • पांचवीं शर्त यह है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के अधिकार को औपचारिक रूप से मान्यता दी जाए।

ये शर्तें उस प्रस्ताव से भी आगे की हैं, जो ईरान ने पहले जिनेवा में हुई बातचीत के दौरान रखी थीं।

28 फरवरी की घटना का असर

ईरान का सख्त रुख 28 फरवरी की घटनाओं से भी जुड़ा हुआ है। ईरान के मुताबिक, उस दिन अमेरिका और इजराइल ने देश पर हमला किया था। इस हमले में सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई के साथ कई वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारी मारे गए थे।

यह हमला जिनेवा में हुई बातचीत के कुछ ही दिनों बाद हुआ था। इसी वजह से ईरान को लगता है कि बातचीत के दौरान भी सैन्य कार्रवाई हो सकती है।

शर्तें पूरी होने से पहले बातचीत नहीं

ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक वह किसी भी नई बातचीत में शामिल नहीं होगा। अधिकारी ने कहा कि इन शर्तों से पहले कोई वार्ता नहीं होगी।

यह रुख अमेरिका की रणनीति से बिल्कुल उलट है, क्योंकि वह बातचीत को तनाव कम करने का रास्ता मानता है।

अमेरिकी प्रस्ताव में क्या है

मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिकी प्रस्ताव की कुछ जानकारी सामने आई है। पाकिस्तान और मिस्र के अधिकारियों ने Associated Press को बताया कि इस 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव में कई शर्तें शामिल हैं।

इसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की बात है। साथ ही उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, मिसाइल क्षमता पर नियंत्रण और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन कम करने जैसी मांगें भी शामिल हैं। इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की बात भी प्रस्ताव में है।

अमेरिका का यह प्रस्ताव सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक प्रोत्साहनों को साथ जोड़ने की कोशिश माना जा रहा है। लेकिन ईरान को यह ढांचा बहुत व्यापक और प्रतिबंधात्मक लगता है।

तेल बाजार और हॉर्मुज जलडमरूमध्य

इस पूरे संकट में हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक अहम भूमिका निभा रहा है। ईरान की कार्रवाइयों, समुद्री आवाजाही पर प्रतिबंध और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की वजह से तेल की कीमतों में तेजी आई है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होता है।

ईरान ने कुछ जहाजों को गुजरने दिया है, लेकिन अमेरिका, इजराइल या उनके सहयोगियों से जुड़े जहाजों को रोक दिया है। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है और अमेरिका पर समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ा है।

बढ़ती मौतें और गहराता संकट

इस संघर्ष की मानवीय कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मृतकों की संख्या 1,500 से ज्यादा हो चुकी है। इजराइल ने 20 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिनमें लेबनान में मारे गए दो सैनिक भी शामिल हैं। कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई है।

इसके अलावा वेस्ट बैंक और खाड़ी के कई अरब देशों में भी आम नागरिकों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।

फिलहाल बना हुआ है गतिरोध

ईरान द्वारा अमेरिकी प्रस्ताव ठुकराए जाने से यह साफ है कि दोनों पक्षों के बीच फिलहाल गतिरोध बना हुआ है। अमेरिका बातचीत के जरिए शांति की शर्तें तय करना चाहता है, जबकि ईरान कह रहा है कि पहले उसकी शर्तें मानी जाएं, तभी बातचीत होगी।

विश्वास की कमी और दोनों पक्षों के सख्त रुख के कारण फिलहाल तनाव कम होने की कोई स्पष्ट राह नजर नहीं आ रही है। दोनों देश समझौते के बजाय लंबे संघर्ष के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।

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