अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिकी सेना ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स को निशाना बनाया। इसके अलावा बंदर अब्बास पोर्ट के पास सरफेस टू एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) के मुताबिक यह कार्रवाई सेल्फ-डिफेंस में की गई। वहीं इस हमले के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई है। IRGC ने अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। बता दें कि, MQ-9 की कीमत लगभग $30 मिलियन है।
ईरान ने कहा है कि वह किसी भी नए युद्ध या तनाव का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भविष्य में कोई नया टकराव हुआ, तो इस बार जवाब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगा। ईरानी सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकरची ने कहा कि तेहरान ने पहले ही कई अहम निशाने तय कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो उसका तरीका पिछली लड़ाइयों से अलग होगा। उन्होंने कहा कि अगर फिर से युद्ध शुरू हुआ, तो ईरान के हमले पहले के मुकाबले ज्यादा बड़े, ज्यादा खतरनाक और ज्यादा ताकतवर हो सकते हैं। शेकरची ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान के तेल निर्यात को रोकने की कोशिश की गई, तो उसका असर पूरे क्षेत्र में तेल सप्लाई पर पड़ सकता है।
अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया
ईरान की सेना आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया। ईरान का कहना है कि यह ड्रोन खाड़ी क्षेत्र में उसके हवाई इलाके के पास देखा गया था और उसे दुश्मन का विमान माना गया। आईआरजीसी ने यह भी कहा कि उसने एक दूसरे अमेरिकी RQ-4 ड्रोन पर नजर रखी। इसके अलावा ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग की, जिसके बाद वह विमान इलाके से वापस चला गया।
आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिकी सेना लगातार खाड़ी क्षेत्र में दखल देने और आक्रामक गतिविधियां करने में लगी हुई है। संगठन के मुताबिक, एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन ईरान के हवाई क्षेत्र में घुस आया था। आईआरजीसी ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सटीक खुफिया जानकारी और निगरानी के बाद ड्रोन की पहचान की और फिर उसे मार गिराया। ईरान ने यह भी साफ किया कि अगर अमेरिका संघर्ष विराम का उल्लंघन करता है, तो उसे जवाब देने का पूरा अधिकार है और वह कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने हज के मौके पर जारी संदेश में अमेरिका को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका को खाड़ी क्षेत्र में पहले जैसी सुरक्षित जगह नहीं मिलेगी।
उन्होंने कहा, “अब हालात पहले जैसे नहीं रहे। इस क्षेत्र के देश और इलाके अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए ढाल नहीं बनेंगे। अमेरिका को अब यहां अपनी ताकत दिखाने या सैन्य अड्डे बनाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं मिलेगी।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने और संघर्ष खत्म करने को लेकर बातचीत चल रही है। वहीं दूसरी तरफ, पूरे क्षेत्र की शांति और दुनिया के तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को लेकर भी चिंता बनी हुई है।