US-Iran War: ईरान ने होर्मुज में दर्जनों कमर्शियल जहाजों को बनाया निशाना! 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, 'नो-गो जोन' का दायरा भी बढ़ाया
US-Iran War: ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक दर्जन से ज्यादा कमर्शियल जहाजों पर हमला किया है। साथ ही, अमेरिका के साथ टकराव को और बढ़ाते हुए उसने रणनीतिक जलमार्ग से आगे एक नया 'नो-गो जोन' (जहां जाने की मनाही है) घोषित कर उसका दायरा बढ़ा दिया है
US-Iran War: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई कमर्शियल जहाजों पर हमला किया है
US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आगे भी फैलता दिखाई दे रहा है। ईरान ने बुधवार को दावा किया कि उसकी सेना ने होर्मुज के आसपास एक दर्जन से ज्यादा जहाजों पर हमला किया है। इसके साथ ही तेहरान ने एक नए घोषित 'नो-गो जोन' यानी प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र का विस्तार कर दिया है। ईरान के इस कदम से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर तनाव और बढ़ गया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ा और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 101.21 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
दो अमेरिकी जहाज और कई तेल टैंकर निशाने पर
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसके बलों ने क्षेत्र से गुजरने की कोशिश कर रहे दो अमेरिकी जहाजों, आठ तेल टैंकरों और 10 ‘गैर-अनुपालन करने वाले’ जहाजों को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन जहाजों ने ईरान की ओर से तय नियमों और चेतावनियों का पालन नहीं किया था। दूसरी ओर, ब्रिटेन के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी कहा कि खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कई जहाजों पर जारी सैन्य गतिविधियों के दौरान ‘डिसेबलिंग फायर’ किया गया।
होर्मुज से आगे बढ़ाया 'नो-गो जोन'
ईरान ने पहली बार अपने घोषित 'प्रोहिबिटेड जोन' का विस्तार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आगे ओमान की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों तक कर दिया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता होसैन मोहेबी ने चेतावनी दी कि जो भी जहाज बिना ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय किए इस क्षेत्र में प्रवेश करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ईरानी सरकारी टेलीविजन पर मोहेबी ने कहा कि यदि कोई जहाज बिना समन्वय के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उसे ईरान के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर भी हमला
ईरान ने यह भी दावा किया कि उसकी सेना ने जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। तेहरान के मुताबिक, यह हमला अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किया गया, जिसमें एक दिन पहले पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया गया था। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने देश की ओर दागी गई 18 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमले को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खुला खतरा बताया। वहीं, अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले को ईरान ने ‘आत्मरक्षा’ की कार्रवाई करार दिया।
अमेरिका ने क्यों किया ईरानी टैंकरों पर हमला?
अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई उस समय की, जब ईरान की ओर से एक अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एक सप्ताह से भी कम समय में इस तरह की यह दूसरी घटना है। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और गंभीर हो गया है।
होर्मुज में कई हफ्तों से जारी है तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पिछले कई हफ्तों से आवाजाही प्रभावित है। ईरान ने समुद्री जहाजों से जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए अनुमति लेने और ट्रांजिट फीस देने की मांग की है। होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी बड़े व्यवधान से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
मार्को रुबियो की चेतावनी- अमेरिकी कार्रवाई जारी रहेगी
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाता है, तो अमेरिका ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाना जारी रखेगा। इस बयान से साफ है कि वॉशिंगटन फिलहाल ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य और आर्थिक दबाव की रणनीति को कम करने के मूड में नहीं है।
ट्रंप का दावा- मिडटर्म चुनाव के बाद तुरंत खत्म हो सकता है युद्ध
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद युद्ध तुरंत खत्म हो सकता है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें लगता है कि चुनाव के तुरंत बाद युद्ध समाप्त हो जाएगा, क्योंकि ईरान अब ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि तेहरान अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों को सत्ता में लाना चाहता है जो ईरान के प्रति नरम रुख अपनाएं। हालांकि, अमेरिकी अखबार The Wall Street Journal के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने निजी तौर पर चेतावनी दी है कि यह संघर्ष ट्रंप के कार्यकाल के बाकी बचे दो वर्षों तक भी खिंच सकता है।
ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए रखी शर्तें
ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि युद्ध समाप्त किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए अमेरिका को तेहरान की कई मांगें माननी होंगी। इन मांगों में यमन की नाकाबंदी खत्म करना, लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी और अरबों डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है।
फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोई ठोस प्रक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में होर्मुज में जहाजों पर हमले, तेल टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई और दोनों देशों की बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन गई हैं।