अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहे है। हालात एक बार फिर ऐसे बन गए हैं कि, दोनों देशों के बीच चल रहा सीजफायर जल्द ही टूट सकता है। वहीं ईरान-अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई हैं। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि हमने पाकिस्तान को 10 सूत्रीय प्रस्ताव सौंप दिया है। वहीं ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान अमेरिका के साथ कोई शांति वार्ता नहीं करने जा रही है।
इसी बीच अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान का एक ट्रांसपोर्ट शिप को पकड़ लिया है। अमेरिका का कहना है कि यह जहाज उसकी लगाई गई रोक (नाकेबंदी) को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत के अगले दौर में हिस्सा नहीं लेगा। यह बातचीत सीज़फायर खत्म होने से पहले शुरू होने की उम्मीद थी।
अमेरिका ने ईरानी जहाज पर किया कब्जा
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी हुई है। वहीं ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ों पर लगी अपनी रोक को पहले हटाया, लेकिन बाद में फिर से लागू कर दिया। यह जलडमरूमध्य बहुत अहम है, क्योंकि दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। अमेरिकी सेना के अनुसार, रविवार को करीब छह घंटे तक तनाव बना रहा। इसके बाद उन्होंने ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर जा रहे एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज़ पर गोलीबारी की। इस हमले में जहाज़ का इंजन खराब हो गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि इसके बाद अमेरिकी मरीन सैनिक हेलीकॉप्टर से रस्सी के जरिए जहाज़ पर उतरे और उसे अपने कब्ज़े में ले लिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जहाज़ अब पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और उसकी जांच की जा रही है। वहीं ईरान की सेना का कहना है कि यह जहाज़ चीन से आ रहा था। सरकारी मीडिया के मुताबिक, एक सैन्य प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि ईरान की सेना इस कार्रवाई का जल्द जवाब देगी और इसे “समुद्री डकैती” बताया है।
ईरान ने बातचीत से किया इनकार
ईरान ने नई शांति वार्ता में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, उसने इसके पीछे कई कारण बताए हैं—जैसे जारी नाकेबंदी, लगातार दी जा रही धमकियां और वॉशिंगटन का बदलता रुख और ज्यादा सख्त मांगें। ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि कोई भी देश ईरान के तेल निर्यात को रोककर खुद के लिए सुरक्षित माहौल की उम्मीद नहीं कर सकता। उन्होंने साफ कहा कि या तो सभी देशों के लिए तेल का बाजार खुला रहेगा, या फिर सभी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान उनकी शर्तें नहीं मानेगा, तो अमेरिका उसके पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बना सकता है। हाल के दिनों में ऐसी सख्त चेतावनियाँ लगातार दी जा रही हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उसने कहा है कि अगर उसके देश के जरूरी ढांचे पर हमला होता है, तो वह खाड़ी क्षेत्र के अरब देशों के बिजली घरों और पानी साफ करने वाले संयंत्रों को निशाना बनाएगा।