इजरायल ने कहा है कि उसने लेबनान में अपने हमलावर सैन्य अभियान फिलहाल रोक दिए हैं। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को शक है कि यह संघर्षविराम (Ceasefire) ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर तनाव अभी भी बना हुआ है।
इजरायल ने कहा है कि उसने लेबनान में अपने हमलावर सैन्य अभियान फिलहाल रोक दिए हैं। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को शक है कि यह संघर्षविराम (Ceasefire) ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर तनाव अभी भी बना हुआ है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक समझौता हुआ है, लेकिन इजरायल इस समझौते का हिस्सा नहीं है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि इजरायल ने तुरंत प्रभाव से हमले रोकने पर सहमति जताई है और लेबनान में आक्रामक कार्रवाई बंद कर दी है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में मौजूद रहेगी और देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
अमेरिकी एजेंसियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि हाल के दिनों में इजरायल-लेबनान सीमा पर हिंसा लगातार जारी रही है। शुक्रवार को हिजबुल्लाह के ड्रोन हमले में चार इजरायली सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 47 लोगों के मारे जाने की खबर है।
इस ताजा हिंसा का असर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत पर भी पड़ा। दोनों देशों के अधिकारियों की स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक को फिलहाल टालना पड़ा।
अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके कई वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उन्हें डर है कि यह समझौता इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों में भी कुछ तनाव की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, ऐसा कोई संकेत नहीं है कि इजरायल अमेरिका से अपने संबंध कमजोर करना चाहता है। माना जा रहा है कि नेतन्याहू आने वाले चुनावों से पहले ट्रंप के साथ अपने रिश्ते बेहतर करना चाहते हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हाल ही में नेतन्याहू सरकार के कुछ मंत्रियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस समय ट्रंप ही ऐसे बड़े विश्व नेता हैं जो इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं, इसलिए इजरायल को अपने सबसे ताकतवर सहयोगी पर सार्वजनिक हमला नहीं करना चाहिए।
वहीं, इजरायल का कहना है कि लेबनान में उसकी सैन्य कार्रवाई केवल आत्मरक्षा के लिए है और इसका उद्देश्य हिजबुल्लाह के हमलों को रोकना है। लेकिन लगातार हो रही झड़पों को देखते हुए अमेरिकी एजेंसियां अभी भी इस बात को लेकर आशंकित हैं कि यह संघर्षविराम लंबे समय तक कायम रह पाएगा या नहीं।
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