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इजराइल में नेतनयाहू की कुर्सी खतरे में! अब तो सहयोगी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी पार्टी ने भी छोड़ा साथ, अब आगे क्या?

इजराइल में सरकार गठन को लेकर नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुराने सहयोगी यूनाइटेड टोरा जूडिज्म ने किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया जबकि अरब नेतृत्व वाली पार्टी ने गादी आइजेनकोट का साथ दिया है। राष्ट्रपति को 11 नवंबर तक फैसला करना है।

karanअपडेटेड Nov 05, 2026 पर 7:06 PM
इजराइल में नेतनयाहू की कुर्सी खतरे में! अब तो सहयोगी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी पार्टी ने भी छोड़ा साथ, अब आगे क्या?
Israeli Parliament Election

इजराइल में चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी सियासी उठापटक के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनकी लंबे समय से सहयोगी रही अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी पार्टी यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) ने गुरुवार को किसी भी उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की सिफारिश करने से इनकार कर दिया। दूसरी ओर अरब नेतृत्व वाली एक पार्टी ने नेतन्याहू के मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट का समर्थन कर दिया है। आपको बता दें कि इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 120 सदस्यीय संसद में 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन उनके राष्ट्रवादी-धार्मिक गठबंधन को कुल 53 सीटें ही मिल सकीं। वहीं पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले नेतन्याहू विरोधी गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए दोनों पक्षों के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को तय करना है कि सरकार बनाने के लिए किस नेता को आमंत्रित किया जाए। राष्ट्रपति नेतन्याहू और आइजेनकोट से अलग-अलग मुलाकात करने वाले हैं। उनके पास 11 नवंबर तक यह फैसला लेने का समय है। अगर कोई भी उम्मीदवार सरकार बनाने में सफल नहीं होता है तो इजराइल में फिर से चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।

नेतन्याहू के पुराने सहयोगी ने किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया

सरकार गठन की कोशिशों के बीच यूनाइटेड टोरा जूडिज्म का रुख नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह पार्टी इजराइल के अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली दो प्रमुख पार्टियों में से एक है और लंबे समय से नेतन्याहू के गठबंधन की सहयोगी रही है। गुरुवार को पार्टी ने सरकार बनाने के लिए किसी भी उम्मीदवार के नाम की सिफारिश नहीं की। इसका मतलब है कि उसने फिलहाल नेतन्याहू के समर्थन में खुलकर खड़े होने से परहेज किया है। हालांकि पार्टी ने किसी दूसरे नेता के समर्थन की घोषणा भी नहीं की है।

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