Jensen Huang: ट्रंप ने लाइव पैनल में Nvidia CEO को लगाया फोन, बोले- 'अगले 25 साल का तेल हैं डेटा सेंटर'
Jensen Huang News: सोमवार (14 सितंबर) को एक पैनल डिस्कशन के दौरान अमेरिका की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी Nvidia कॉर्प के CEO जेन्सेन हुआंग को पास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लाइव फ़ोन आ गया। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े खतरों को धोखा करार दिया
Jensen Huang News: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर जेन्सेन हुआंग से बात की
Jensen Huang News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (14 सितंबर) को उस वक्त सबको चौंका दिया, जब उन्होंने एक लाइव पैनल चर्चा के दौरान अमेरिका की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग को फोन कर दिया। लॉस एंजिल्स में आयोजित All-In समिट में हुआ यह फोन कॉल चर्चा का प्रमुख आकर्षण बन गया। बातचीत के दौरान ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं को खारिज करते हुए इसे एक तरह का 'होक्स' यानी झूठा डर बताया।
पैनल चर्चा के दौरान हुआ यह फोन कॉल ऐसे समय में आया है, जब AI के तेजी से विकास और इससे जुड़े संभावित खतरों को लेकर टेक इंडस्ट्री में बहस तेज है। कुछ एक्सपर्ट और AI कंपनियों के कर्मचारी विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग कर रहे हैं।
AI की रफ्तार धीमी करने की मांग पर ट्रंप ने उठाए सवाल
फोन पर ट्रंप ने AI के विकास की रफ्तार कम करने की कोशिशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि AI को धीमा करने की कोशिश के पीछे राजनीतिक हित हो सकते हैं या फिर यह चीन के हित में जा सकता है। ट्रंप ने इस बहस को लेकर कहा कि AI के विकास को रोकने की कोशिश उन लोगों के हाथ मजबूत कर रही है, जो इसे आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते। Nvidia CEO ने भी ट्रंप की बात से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने इस जटिल मुद्दे को सही तरीके से समझा है।
AI सुरक्षा को लेकर चिंता जताने वाले रिसर्चर की भी तारीफ
दिलचस्प बात यह रही कि AI के खतरों को लेकर चिंता जताने वाले लोगों की आलोचना के बावजूद Huang ने Anthropic के उस रिसर्चर की तारीफ की, जिसने इन चिंताओं के कारण कंपनी से इस्तीफा दिया। Anthropic के रिसर्चर जेकब कॉक्सन ने AI के संभावित खतरों को लेकर चिंता जताते हुए कंपनी छोड़ दी थी। Huang ने उन्हें अपनी चिंताओं को सामने रखने के लिए साहसी बताया। उन्होंने कहा कि कंपनियों के भीतर व्हिसलब्लोअर्स यानी गंभीर मुद्दों की जानकारी सामने लाने वाले कर्मचारियों की बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
हालांकि Huang ने यह भी कहा कि मौजूदा बहस ने AI को लेकर एक गलत विकल्प खड़ा कर दिया है। जैसे या तो तेजी से AI का विकास किया जाए या फिर AI की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनके मुताबिक दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
AI को लेकर टेक इंडस्ट्री में बढ़ी बहस
AI के मानवता के लिए संभावित खतरे को लेकर हाल के दिनों में चर्चा काफी तेज हुई है। जेकब कॉक्सन के इस्तीफे के बाद यह बहस और बढ़ गई। Coxon ने आरोप लगाया था कि Anthropic और OpenAI AI को लेकर ऐसे प्रयोग कर रहे हैं, जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
इसके बाद Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने शनिवार को करीब 3,800 शब्दों का एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें AI के विकास की गति को नियंत्रित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस विचार का समर्थन OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन और SpaceX CEO एलॉन मस्क ने भी किया।
AI खर्च धीमा होने की आशंका से टेक शेयरों में गिरावट
AI को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर अमेरिकी शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सोमवार को टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च भविष्य में धीमा पड़ सकता है। दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Nvidia के शेयरों में सोमवार को 3.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Nvidia के चिप्स का इस्तेमाल AI मॉडल को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से कंपनी को जबरदस्त फायदा मिला है।
डेटा सेंटर निर्माण के बड़े समर्थक हैं ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अमेरिका में नए डेटा सेंटर बनाने की वकालत करते रहे हैं। हालांकि कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटर परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और परमिट से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। ट्रंप ने उन अमेरिकी राज्यों की आलोचना की, जो नए डेटा सेंटर बनाने के लिए परमिट देने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर लोगों और राज्यों के लिए बड़ी संपत्ति और कमाई का जरिया बन सकते हैं।
'अगले 20-25 साल का तेल हैं डेटा सेंटर'
ट्रंप ने डेटा सेंटर की अहमियत बताते हुए कहा कि ये आने वाले दशकों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने डेटा सेंटर को अगले 20 से 25 वर्षों का तेल करारा देते हुए कहा कि इसका महत्व इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। AI मॉडल को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़े और अत्याधुनिक डेटा सेंटर जरूरी हैं।