Iran Crisis: ईरान में पिछले कई दिनों से हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हुई मौतों के भयानक आंकड़े को पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। एक राष्ट्रव्यापी संबोधन में उन्होंने माना कि हफ्तों से चल रही अशांति में 'कई हजार लोग' मारे गए हैं। हालांकि, खामेनेई ने इन मौतों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। दिसंबर के अंत में ईरानी मुद्रा रियाल की गिरती कीमत से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब राजनीतिक बदलाव की एक व्यापक और हिंसक लहर में बदल चुका है, जिससे ईरान की स्थिरता खतरे में नजर आ रही है।
'अमेरिका और इजरायल ने भड़काई हिंसा'
ईरान के सर्वोच्च नेता ने मौतों को स्वीकार करने के साथ-साथ कड़ा रुख अपनाते हुए बाहरी ताकतों पर निशाना साधा। खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'अपराधी' करार देते हुए कहा कि वह ईरानी लोगों की मौतों, नुकसान और उन पर लगाए गए झूठ आरोपों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ईरान पर सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक प्रभुत्व चाहते हैं और उनके पास इस हिंसा में विदेशी हाथ होने के सबूत हैं। खामेनेई ने कहा कि कुछ लोगों को 'अमानवीय और बर्बर' तरीके से मारा गया है और वे इन अपराधियों को सजा दिए बिना नहीं छोड़ेंगे।
8 जनवरी से ईरान में है डिजिटल ब्लैकआउट
ईरान में जमीनी हालात बेहद गंभीर हैं, जिसका अंदाजा मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। स्वतंत्र संगठनों का अनुमान है कि अब तक 3,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 22,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। 8 जनवरी से ईरान की 9.2 करोड़ की आबादी को दुनिया से लगभग काट दिया गया है। मॉनिटरिंग ग्रुप 'NetBlocks' के अनुसार, इंटरनेट एक्सेस सामान्य स्तर का केवल 2% ही रह गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खामेनेई को 'बीमार आदमी' कहते हुए प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और तेहरान में नए नेतृत्व की मांग की है। उन्होंने कहा कि खामेनेई हिंसा के उस स्तर का उपयोग कर रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखा गया।