ईरान में मोजतबा की ताजपोशी पर छिड़ा 'पावर वॉर', अली लारीजानी बने सबसे बड़ी चुनौती, क्या कमजोर पड़ेगी सत्ता की पकड़?

Mojtaba Khamenei: मोजतबा के समर्थक और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ के साथ लारीजानी के मतभेद जगजाहिर हैं। यह प्रतिद्वंद्विता अब गहरी खाई में बदल चुकी है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक पद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि भविष्य में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में रहेगी

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 12:01 PM
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खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ईरान के प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व अली लारीजानी ने मोजतबा की राह मुश्किल कर दी है

Mojtaba Khamenei: ईरान में मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया है, लेकिन खुफिया सूत्रों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इस्लामिक रिपब्लिक के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष खत्म नहीं होगा। इस सत्ता परिवर्तन के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरे हैं अली लारीजानी। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ईरान के प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व अली लारीजानी ने मोजतबा की राह मुश्किल कर दी है। लारीजानी लंबे समय से व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और सुरक्षा संस्थानों में उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

मोजतबा के समर्थक और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ के साथ लारीजानी के मतभेद जगजाहिर हैं। यह प्रतिद्वंद्विता अब गहरी खाई में बदल चुकी है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक पद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि भविष्य में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में रहेगी।

वंशवाद का डर और वैचारिक विरोध


मोजतबा की नियुक्ति ने ईरान के धार्मिक नेतृत्व के भीतर भी एक नई बहस छेड़ दी है। 1979 की क्रांति राजशाही और वंशवाद को खत्म करने के लिए हुई थी। अब अली खामेनेई के बाद उनके बेटे का नेता बनना कई वरिष्ठ मौलवियों को रास नहीं आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'वंशवाद' जैसी छवि बनने से इस्लामिक रिपब्लिक की धार्मिक और क्रांतिकारी साख को चोट पहुंच सकती है।

अली लारीजानी का 'कमबैक' प्लान

भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरने के बाद हाशिए पर जा चुके लारीजानी परिवार ने अपनी ताकत फिर से जुटा ली है। विश्लेषकों का आरोप है कि लारीजानी ने दिसंबर 2025 में हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। माना जा रहा है कि ऐसा उन्होंने सुरक्षा प्रतिष्ठान में अपनी अहमियत साबित करने के लिए किया। साथ ही लारीजानी अपनी धार्मिक वंशावली और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर व्यवस्था के भीतर खुद को मुजतबा के एक 'अनिवार्य' विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं।

अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और शीर्ष सुरक्षा परिषदें अब एक 'सर्वाइवल मॉडल' पर काम कर रही हैं। विदेशी दबाव और घरेलू अशांति को देखते हुए शासन का पहला लक्ष्य दुनिया के सामने एक एकजुट लीडरशिप पेश करना है। अधिकारियों को डर है कि अगर नेतृत्व के भीतर की लड़ाई सार्वजनिक हुई, तो इससे घरेलू विरोध प्रदर्शनों को बल मिलेगा और बाहरी दुश्मनों को फायदा होगा।

युद्ध और अस्थिरता के बीच फंसा ईरान

युद्ध, तेल रिफाइनरियों पर हमले और आंतरिक सत्ता संघर्ष, ईरान इस समय तिहरी मार झेल रहा है। भले ही मोजतबा को औपचारिक रूप से सुप्रीम लीडर बना दिया गया हो, लेकिन लारीजानी जैसे प्रतिद्वंद्वियों की मौजूदगी बताती है कि ईरान के भीतर प्रभाव बनाने की यह जंग अभी कई महीनों तक खिंच सकती है।

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