Nepal Floods: पत्नी से आखिरी बार कहा- 'बाढ़...', फिर कट गया फोन, नेपाल में त्रासदी से बचे लोगों ने सुनाई खौफनाक आपबीती
Nepal-China Border Floods: नेपाल त्रासदी के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो बाढ़ की भयावहता और उसके पीछे छिपे मानवीय दर्द को बयां करती है। मेक बहादुर गुरुंग नेपाल के रसुवा जिले में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे। 26 अगस्त की सुबह वह अपनी पत्नी से फोन पर बात कर रहे थे। उस वक्त सब कुछ सामान्य था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पल बाद हालात पूरी तरह बदलने वाले हैं
Nepal-China Border Floods: किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पल बाद हालात पूरी तरह बदलने वाले हैं
Nepal-China Border Floods: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने सिर्फ घरों और इंफ्रास्ट्रक्चर को ही नहीं उजाड़ा, बल्कि कई परिवारों से उनके अपने भी छीन लिए। इस त्रासदी के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो बाढ़ की भयावहता और उसके पीछे छिपे मानवीय दर्द को बयां करती है। मेक बहादुर गुरुंग नेपाल के रसुवा जिले में स्थित अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में सुरक्षा सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे। 26 अगस्त की सुबह वह अपनी पत्नी से फोन पर बात कर रहे थे। उस वक्त सब कुछ सामान्य था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पल बाद हालात पूरी तरह बदलने वाले हैं।
बातचीत के दौरान गुरुंग ने अपनी पत्नी से सिर्फ एक शब्द कहा- "बाढ़...।" इसके तुरंत बाद फोन की लाइन कट गई। यह छोटा-सा शब्द उस समय पैदा हुए खतरे की भयावहता को समझने के लिए काफी था। इसके बाद संपर्क टूट गया। फिर उनकी कोई खबर नहीं मिली। परिवार अब उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठा है।
तीन दिन बाद भी नहीं मिला कोई सुराग
उस फोन कॉल को तीन दिन बीत चुके हैं। लेकिन गुरुङ का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार के लिए सबसे मुश्किल बात यह है कि आखिरी बार उनकी आवाज सुनाई देने के बाद से उन्हें यह तक पता नहीं कि वह कहां हैं और किस हालत में हैं। जिस दिन गुरुङ अपनी पत्नी से बात कर रहे थे, वह उनके लिए एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुआ था। लेकिन हिमालयी क्षेत्र में अचानक आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कुछ ही समय में सब कुछ बदल दिया।
'दूसरी जिंदगी मिली...'
नेपाल के रसुवा जिले में सीमा शुल्क एजेंट के रूप में काम करने वाले राजू बुधाथोकी के लिए बुधवार की सुबह किसी आम दिन की तरह शुरू हुई थी। लेकिन कुछ ही देर में यह जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में बदल गई। जमीन कांपने लगी और देखते ही देखते उफनती बाढ़ उनके सामने घरों को बहाकर ले गई।
'द काठमांडू पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधाथोकी सुबह करीब 8:45 बजे (स्थानीय समय) तिमुरे स्थित अपने कमरे में आराम कर रहे थे। तभी पहाड़ी जोर-जोर से हिलने लगी। उन्हें लगा कि भूकंप आया है। वह बाहर निकलकर पास की पुलिस चौकी की ओर भागे, लेकिन वहां तैनात पुलिसकर्मी भी इलाके से भागते दिखाई दिए।
वह तार की बाड़ पार करते समय हाथ में चोट लगने के बावजूद भागते रहे। पीछे मुड़कर देखा तो तिमुरे बाजार में एक के बाद एक मकान बाढ़ के पानी में बह रहे थे। वह आखिरकार करीब 500 मीटर ऊपर स्थित एक जंगल तक पहुंचे और अपनी जान बचाई।
अस्पताल के बिस्तर से उन्होंने अखबार को बताया, "जंगल से जब मैंने तिमुरे की ओर नीचे देखा तो तबाही का मंजर देख कर कांप गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इस तरह दूसरी जिंदगी मिलेगी। अब सब कुछ एक भयानक सपने जैसा लगता है।" बुधाथोकी उन लोगों में शामिल हैं जो रसुवागढ़ी और इसके नीचे के कई इलाकों में नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाने वाली भोटेकोशी नदी की अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से बाल-बाल बच गए।
'मैं बस जिंदा रहना चाहता था...'
एक अन्य सीमा शुल्क एजेंट प्रकाश गौतम ने भी तिमुरे से बच निकलने की खौफनाक कहानी सुनाई। गौतम ने 'द काठमांडू पोस्ट' को बताया कि तेज गर्जना सुनाई देने के कुछ ही क्षण बाद बाजार में अंधेरा छा गया और आसमान काले बादल से ढक गया। उन्होंने कहा, "मैं बिना यह जाने, कि क्या कर रहा हूं, अपने कमरे से बाहर भागा। मुझे पता नहीं था कि कहां जाना है या किस दिशा में भागना है। मैं बस जिंदा रहना चाहता था।"
उन्होंने कहा, "ऊपर जंगल से मैं बाढ़ के पानी में तैरते शव देख सकता था। मेरी आंखों के सामने खूबसूरत तिमुरे खंडहर में बदल गया। घर और बस्तियां बह गईं। अब वहां रेत और कीचड़ का विशाल विस्तार ही नजर आता है।" रिपोर्ट के अनुसार, दिन में बचाव नहीं हो पाने के कारण गौतम और अन्य लोगों ने बुधवार की रात जंगल में बिताई। नेपाल सेना के हेलीकॉप्टर से गिराए गए नूडल्स के पैकेट खाकर उन्होंने रात गुजारी।
नेपाल सेना का एक हेलीकॉप्टर गुरुवार सुबह करीब 10 बजे वहां पहुंचा और उन्हें बिदुर ले गया। गौतम ने कहा, "हेलीकॉप्टर में सवार होने के बाद ही मुझे लगा कि मैं वास्तव में बच गया हूं।" दोलखा के तुलसी बहादुर भंडारी को बाढ़ का तेज बहाव पहाड़ी की ओर धकेल ले गया और वह बच गए। भंडारी ने अखबार को बताया कि काले कीचड़ और पानी का तेज बहाव अचानक बस्ती में घुस आया और एक के बाद एक मकान ढहने लगे। लेकिन उन्होंने बताया कि ढलान की ओर धकेले जाने के कारण वह बाढ़ में बहने से बच गए।
'मैंने सब कुछ खो दिया'
रसुवा के एक अन्य बचे व्यक्ति ने तबाही का जिक्र करते हुए कहा, "वहां कुछ भी नहीं बचा है। मैंने सब कुछ खो दिया।" पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दोनों लापता हैं। कुछ बचे लोगों ने बताया कि नदी के किनारे रहने वाले लोगों को इलाका खाली करने के लिए अलर्ट मिला था। लेकिन उन्हें बच निकलने के लिए बहुत कम समय मिला।
एक स्थानीय निवासी ने पीटीआई से कहा, "हमें करीब 9:35 बजे एक खबर के जरिए चेतावनी मिली कि बाढ़ का पानी आगे बढ़ चुका है। नदी क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों को वहां से निकल जाना चाहिए। लेकिन हमारे पास वहां से निकलने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं था।"
उन्होंने कहा, "यहां पहले दो पुल हुआ करते थे। अब मुश्किल से कुछ घर बचे हैं। मुझे नहीं पता कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालेगी।" नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बचाव दल रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों में जीवित बचे लोगों तथा अब भी लापता लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं।
एक बचाव दल के सदस्य ने न्यूज एजेंसी को बताया कि हताहतों की पूरी संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है और करीब 1,000 लोग लापता हैं। बचाव दल के सदस्य ने बताया कि तिब्बत क्षेत्र से अचानक आई बाढ़ का पानी भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में गया। इसने पुलों और स्थानीय ढांचों को बहा दिया। भीषण बाढ़ से विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं।