Nepal Flood Update: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और त्रासदी के बीच एक ऐसी उम्मीद और चमत्कार की खबर सामने आई है जिसने मातम मना रहे पूरे देश के अंदर एक नई किरण जगा दी है। नेपाल के काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिकत 26 अगस्त को आई तबाही के 10वें दिन त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक सुरंग से जीवित बचे लोगों की आवाजें सुनाई दी हैं। इस सूचना के बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमों ने सुरंग में अंदर घुसकर बचाव अभियान को तेज कर दिया है।
सांसद और इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने का बड़ा दावा
नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद श्रीराम न्यौपाने ने इस चमत्कारिक घटना की पुष्टि की है। न्यौपाने खुद एक इंजीनियर हैं और शुरुआत से ही राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। सांसद न्यौपाने ने सोशल मीडिया और फेसबुक पोस्ट के जरिए जानकारी साझा करते हुए लिखा कि 'त्रिशूली 3A अपडेट: रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।
यह कन्फर्म हो गया है कि अंदर से एक से ज्यादा लोगों की आवाजें सुनी गई हैं। जब रेस्क्यू टीम ने अंदर पुकारते हुए कहा कि घबराओ मत, हम रेस्क्यू कर रहे हैं, तो अंदर फंसे लोगों की ओर से जवाब आया हां।' उन्होंने आगे कहा कि नेपाली सेना से सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमों ने सुरंग में उतरकर ऑपरेशन तेज कर दिया है। आपदा के इतने दिनों बाद भी सुरंग के अंदर से इंसानी आवाजें और बातचीत सुनाई देना एक बेहद उत्साहजनक संकेत है।
1250 से ज्यादा मौतें और 5000 से अधिक लापता
यह चमत्कार ऐसे समय पर सामने आया है जब नेपाल में इस आपदा से हुई तबाही का आंकड़ा बेहद भयावह रूप ले चुका है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हुए हिम-चट्टान स्खलन की वजह से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 1259 तक पहुंच गई है जबकि 5083 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सीमा के पास तिब्बत के गिरोंग काउंटी में भी इस बाढ़ से अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 541 लोग लापता हैं।
उम्मीद टूटने पर कुश के पुतलों से प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार
ऑनलाइनखबर और द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कई दिनों तक अपनों का कोई सुराग न मिलने की वजह से कई इलाकों में परिवारों ने जीवित मिलने की उम्मीद छोड़ दी है। रसुवा जिले के पहरेबेसी गांव सहित कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए विवश हैं।
मलबे से सभी शवों का निकलना नामुमकिन सा देखकर और शवों की पहचान न हो पाने की वजह से परिवार अब कुश की घास से पुतले बनाकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ऐसे निराशाजनक माहौल में त्रिशूली 3A हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल से मिली यह आवाज किसी चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही है और राहत टीमें अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं।