नेपाल में 60% बढ़ चुके हैं डीजल के दाम, पेट्रोल और LPG भी खूब महंगे, पड़ोसी देश में कुछ ऐसा है महंगाई का हाल

Nepal Fuel Price Hike May 2026: पेट्रोल-डीजल के साथ रसोई गैस भी 11.5% महंगी हो गई है। ईंधन के दाम बढ़ने से नेपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया 20% और माल ढुलाई की लागत 17% तक बढ़ गई है, जिससे महंगाई चौतरफा कहर बरपा रही है

अपडेटेड May 25, 2026 पर 12:05 PM
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नेपाल में पिछले तीन महीनों के भीतर डीजल की कीमतों में 60% और पेट्रोल के दामों में 28% का रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया है

Nepal Inflation: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव की तपिश अब भारत के पड़ोसी देश नेपाल तक पहुंच गई है। इंपोर्ट पर पूरी तरह निर्भर होने के कारण नेपाल में महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। 'काठमांडू पोस्ट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में पिछले तीन महीनों के भीतर डीजल की कीमतों में 60% और पेट्रोल के दामों में 28% का रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया है।

इसके साथ ही रसोई गैस भी 11.5% महंगी हो गई है। ईंधन के दाम बढ़ने से नेपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया 20% और माल ढुलाई की लागत 17% तक बढ़ गई है, जिससे महंगाई चौतरफा कहर बरपा रही है। आइए आपको बताते हैं कि नेपाल में इस वक्त क्या हालात हैं और कैसे एक आम परिवार का बजट पूरी तरह तबाह हो चुका है।

थाली से दूर हुई दाल-रोटी, सातवें आसमान पर तेल और चावल के दाम


ईंधन की कीमतों में लगी आग का सीधा असर नेपाल के किचन पर पड़ा है। खुदरा व्यापारियों के मुताबिक, माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम हर हफ्ते बदल रहे हैं:

कीर्तिपुर की रहने वाली राधा संजेल बताती हैं कि जो जीरा मसीनो चावल के 25 किलो का कट्टा एक महीने पहले ₹2000 में मिलता था, अब उसकी कीमत ₹2250 हो गई है। वहीं लॉन्ग-ग्रेन बासमती चावल की कीमत ₹3200 से बढ़कर ₹3500 प्रति 20 किलो तक पहुंच गई है।

सनफ्लावर ऑयल की कीमत ₹265 से बढ़कर सीधे ₹300 प्रति लीटर हो गई है। वहीं सरसों का तेल जो पहले ₹350 से ₹375 लीटर था, अब ₹460 प्रति लीटर के पार बिक रहा है।

नेपाल के मिडिल क्लास परिवारों की मासिक आय जस की तस है, लेकिन खर्च दोगुना हो चुका है। जानकारों के मुताबिक, नेपाल में लोग अपनी कमाई का 60% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ पेट भरने पर खर्च करने को मजबूर हैं।

क्यों आफत बनी महंगाई? ये हैं 3 मुख्य कारण

नेपाल में आफत बनी महंगाई को लेकर एक्सपर्ट्स ने ये 3 बड़े कारण बताए हैं:

प्लास्टिक पैकेजिंग का महंगा होना: मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं। इससे प्लास्टिक बनाने वाले पॉलीमर महंगे हो गए। नेपाल पैकेजिंग का प्लास्टिक तीसरे देशों से आयात करता है, जिसकी लागत 40 से 50% बढ़ गई है। नतीजतन चावल और तेल की पैकिंग महंगी होने से अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर आ गिरा है।

भारत से आने वाला धान हुआ महंगा: नेपाल अपनी जरूरत का ज्यादातर महीन और लंबा चावल भारत से धान आयात करके पूरा करता है। घरेलू मिल मालिकों के मुताबिक, भारत से आने वाले धान की कीमत ₹100 प्रति क्विंटल यानी ₹1 प्रति किलो बढ़ गई है, जिससे चावल के दाम बढ़ गए हैं।

डॉलर के मुकाबले नेपाली रुपये की कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से नेपाल के लिए आयात की जाने वाली हर चीज महंगी हो गई है। नेपाल राष्ट्र बैंक के आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता इंफ्लेशन 13 महीने के उच्चतम स्तर 4.47% पर पहुंच गई है। इसमें घी-तेल में 12.87% और फलों में 11.67% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

'स्टैगफ्लेशन' की गिरफ्त में नेपाल, सरकार लाचार!

नेपाल के जाने-माने अर्थशास्त्री चंद्र मणि अधिकारी के मुताबिक, नेपाल इस समय 'स्टैगफ्लेशन' की चपेट में है, जहां आर्थिक विकास दर सुस्त है और महंगाई लगातार बढ़ रही है। पिछले एक दशक में नेपाल की औसत जीडीपी ग्रोथ महज 4% के आसपास रही है।

रेमिटेंस पर निर्भरता ने बिगाड़ा पूरा खेल 

नेपाल की अर्थव्यवस्था में अब विदेशों से आने वाले पैसे की भूमिका बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इस वित्त वर्ष में नेपाल की जीडीपी में रेमिटेंस की हिस्सेदारी बढ़कर 33.02% होने का अनुमान है, जो पिछले साल 27.80% थी। यूएनडीपी की एक रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट संकट लंबा चला और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं कमजोर हुईं, तो नेपाल में रेमिटेंस कम हो जाएगा, जिससे वहां खाद्य असुरक्षा का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

इन सब के बीच नेशनल कंज्यूमर्स फोरम के अध्यक्ष प्रेम लाल महर्जन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कारण अपनी जगह हैं, लेकिन नेपाल की मौजूदा सरकार बाजार में हस्तक्षेप करने और संकट से जूझ रही जनता को राहत देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

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