बिहार की सीमा के पास नेपाल के गंडकी में लीगल हुआ गांजा, जानें क्या हैं नियम

नए कानून के तहत भांग से दवाइयां, जरूरी तेल और औद्योगिक काम में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल तैयार किया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए फसल में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल यानी टीएचसी की मात्रा 0.3 प्रतिशत की अंतरराष्ट्रीय तय सीमा के भीतर होनी जरूरी है। वहीं, निजी इस्तेमाल के लिए भांग उगाना और बिना अनुमति के घर पर इसकी खेती करना अभी भी गैरकानूनी रहेगा

अपडेटेड Aug 08, 2026 पर 11:03 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
नेपाल के गंडकी प्रांत ने देश में पहली बार भांग की नियंत्रित खेती और मेडिकल इस्तेमाल को कानूनी मंजूरी दी है।

नेपाल के गंडकी प्रांत ने देश में पहली बार भांग की नियंत्रित खेती और मेडिकल इस्तेमाल को कानूनी मंजूरी दी है। इस फैसले के तहत लाइसेंस वाली कंपनियां और स्थानीय किसान सरकार की कड़ी निगरानी में भांग की खेती कर सकेंगे। इसके लिए एक तय नियम और व्यवस्था बनाई गई है। भांग का पौधा इस इलाके के पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही प्राकृतिक रूप से उगता है।

नए कानून के तहत भांग से दवाइयां, जरूरी तेल और औद्योगिक काम में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल तैयार किया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए फसल में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल यानी टीएचसी की मात्रा 0.3 प्रतिशत की अंतरराष्ट्रीय तय सीमा के भीतर होनी जरूरी है। वहीं, निजी इस्तेमाल के लिए भांग उगाना और बिना अनुमति के घर पर इसकी खेती करना अभी भी गैरकानूनी रहेगा। नियमों का पालन नहीं करने वाली भांग की फसल को नष्ट करना जरूरी होगा। इस कानून के जरिए गंडकी प्रांत ने भांग की खेती को एक नियंत्रित और कानूनी ढांचे के तहत लाने की पहल की है।

भांग की खेती को लेकर पुराना कानून बना चुनौती


नेपाल में कई दशकों तक भांग पर पूरी तरह रोक लगी रही। 1970 के दशक के आखिर में अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद देश में भांग की खेती और कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इससे नेपाल का मशहूर भांग पर्यटन भी लगभग खत्म हो गया। अब गंडकी प्रांत के नीति बनाने वाले लोग नियंत्रित तरीके से भांग की खेती को आर्थिक विकास का एक जरिया मान रहे हैं। उनका मानना है कि कम उपयोग वाली या बंजर जमीन पर भांग की व्यावसायिक खेती शुरू की जा सकती है। इससे गांवों में रोजगार के नए मौके पैदा होंगे, युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिल सकेगा और उन्हें दूसरे शहरों या देशों में जाने से रोकने में मदद मिल सकती है।

प्रांत की योजना भांग से जुड़े मेडिकल और औद्योगिक बाजारों के लिए उत्पाद तैयार करने की है। इन बाजारों में भांग से बने उत्पादों की मांग ज्यादा होने की उम्मीद है। हालांकि, इस फैसले के सामने एक बड़ी कानूनी चुनौती भी है। गंडकी का प्रांतीय कानून लाइसेंस लेकर भांग की व्यावसायिक खेती की अनुमति देता है, जबकि नेपाल का राष्ट्रीय नशीले पदार्थों से जुड़ा कानून भांग रखने और उसके कारोबार को अपराध मानता है। ऐसे में प्रांतीय कानून और राष्ट्रीय कानून के बीच तालमेल बनाना जरूरी होगा। यही तय करेगा कि गंडकी की भांग नीति लंबे समय तक किस तरह लागू हो पाएगी और इसके लिए कानूनी व्यवस्था कितनी मजबूत बनती है।

खेती करने वालों के लिए सख्त नियम

गंडकी प्रांत के नए कानून में भांग की खेती को लेकर कई सख्त नियम बनाए गए हैं। इनका मकसद भांग के गलत इस्तेमाल को रोकना और खेती से मिलने वाली फसल की गुणवत्ता पर नजर रखना है।

  • खेती की न्यूनतम सीमा: भांग की खेती का लाइसेंस केवल रजिस्टर्ड कंपनियों या कम से कम दो रोपनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों को दिया जाएगा।
  • खरीद का समझौता जरूरी: लाइसेंस की अंतिम मंजूरी से पहले आवेदकों को किसी रजिस्टर्ड दवा कंपनी या औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी के साथ आधिकारिक सप्लाई समझौता जमा करना होगा। यानी किसान या कंपनी को पहले से यह बताना होगा कि तैयार फसल किसे बेची जाएगी।
  • तय इलाकों में ही खेती: भांग की व्यावसायिक खेती हर जगह नहीं की जा सकेगी। इसके लिए कुछ खास इलाकों को चुना जाएगा। इन जगहों का चयन मिट्टी की उपयुक्तता, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में आसानी जैसे आधारों पर किया जाएगा।

बिहार के साथ सीमा पार असर

गंडकी की इस नई नीति का असर सीमा से जुड़े इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। गंडकी की दक्षिणी सीमा भारत के बिहार राज्य से जुड़ी है। यह सीमा बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में वाल्मीकिनगर बॉर्डर के पास है। बिहार में शराब पर पूरी तरह रोक है। इसी वजह से सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां गैरकानूनी सामान की आवाजाही पर कड़ी नजर रखती हैं।

हालांकि, गंडकी का नया कानून मुख्य रूप से दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और औद्योगिक हेम्प की नियंत्रित खेती के लिए बनाया गया है। इसके बावजूद, खुली सीमा को देखते हुए दोनों देशों की सुरक्षा और कानून लागू करने वाली एजेंसियां निगरानी बढ़ा सकती हैं। खास तौर पर यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि कानूनी तरीके से तैयार की जाने वाली भांग या उससे जुड़े उत्पादों की सप्लाई किसी तरह गैरकानूनी बाजार तक न पहुंचे। इससे सीमा पार तस्करी और गैरकानूनी कारोबार को रोकने में मदद मिल सकती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।