पुतिन की भारत यात्रा से पहले जेवर पहुंचा रूस का Ilyushin Il-76, जानें क्यों खास है ये ‘भारी-भरकम’ विमान

2026 ब्रिक्स समिट के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से एक दिन पहले, रूसी वायु सेना का Ilyushin Il-76 भारी मालवाहक विमान जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा। इस विमान में रूसी राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों के तहत सुरक्षा के लिए एक एडवांस टीम और जरूरी सामान लाया गया था।

अपडेटेड Sep 12, 2026 पर 1:51 PM
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पुतिन की भारत यात्रा से पहले जेवर पहुंचा रूस का Ilyushin Il-76

Ilyushin Il-76: 2026 ब्रिक्स समिट के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से एक दिन पहले, रूसी वायु सेना का Ilyushin Il-76 भारी मालवाहक विमान जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा। इस विमान में रूसी राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों के तहत सुरक्षा के लिए एक एडवांस टीम और जरूरी सामान लाया गया था।

राष्ट्रपति पुतिन आमतौर पर Ilyushin Il-96-300PU विमान से यात्रा करते हैं। यह रूस का राष्ट्रपति विमान है। वहीं, Il-76 का इस्तेमाल भारी सामान, जरूरी सामान, सैनिकों और अन्य लॉजिस्टिक सामान को ले जाने के लिए किया जाता है। यही वजह है कि पुतिन जैसे बड़े नेता की यात्रा से पहले तैयारियों के लिए इस विमान का इस्तेमाल किया गया।

Ilyushin Il-76 क्या है?


Ilyushin Il-76, जिसे NATO रिपोर्टिंग नाम "कैंडिड" (Candid) से भी जाना जाता है, चार इंजन वाला टर्बोफैन स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्टर है। इसे मूल रूप से सोवियत संघ के इल्यूशिन डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया था। अब इस विमान के प्रोडक्शन और आधुनिकीकरण का काम रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन देखती है।

इस विमान को मुश्किल हालात में काम करने के लिए डिजाइन किया गया था और यह छोटे, बिना पक्के या बिना तैयारी वाले एयरफील्ड पर भी उतर सकता है। इसे दूर-दराज या कम सुविधा वाले इलाकों तक भारी मशीनरी, मिलिट्री गाड़ियां और भारी मात्रा में सामान पहुंचाने के लिए बनाया गया था।

Il-76 में टाइटेनियम का कार्गो फ्लोर और एक इंटीग्रेटेड रैंप सिस्टम है, जिससे सामान को आसानी से अंदर-बाहर (रोल-ऑन/रोल-ऑफ) किया जा सकता है। इसमें दो इंटरनल इलेक्ट्रिक विंच हैं, जिनमें से हर एक तीन टन तक का वजन खींच सकता है, और चार ओवरहेड इलेक्ट्रिक होइस्ट हैं जिनकी कुल उठाने की क्षमता 10 टन तक है।

इसका मजबूत, मल्टी-व्हील लैंडिंग गियर खास फ्यूजलेज फेयरिंग में लगा होता है, जिससे यह विमान जमी हुई बर्फ, मिट्टी और घास जैसी सतहों से भी ऑपरेट कर सकता है।

भारत Il-76 का भी इस्तेमाल करता है

भारत 1985 से Il-76 का इस्तेमाल कर रहा है और भारतीय वायु सेना इसे अपनी रणनीतिक भारी-भरकम सामान ढोने की क्षमता के एक अहम हिस्से के तौर पर इस्तेमाल करती है। भारत में इस विमान को "गजराज" या "हाथियों का राजा" के नाम से भी जाना जाता है।

IAF के पास 17 Il-76MD रणनीतिक भारी ट्रांसपोर्ट विमान हैं, जिनमें 44 स्क्वाड्रन, यानी "माइटी जेट्स" के विमान भी शामिल हैं। इनका इस्तेमाल सैनिकों, बख्तरबंद गाड़ियों और भारी सामान को लाने-ले जाने के लिए किया जाता है।

भारत छह Il-78MKI विमानों का भी इस्तेमाल करता है, जो Il-78MKI के खास वर्जन हैं और हवा में ही ईंधन भरने के लिए तैयार किए गए हैं। Il-78MKI का इस्तेमाल हवा में ही IAF के फाइटर जेट्स में ईंधन भरने के लिए किया जाता है।

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