पहले कुर्सी पर बिठाया, अब उतारने पर अड़े! बालेन शाह की इस करतूत पर भड़के नेपाल के Gen-Z, सड़कों पर मचा भारी बवाल

Balen Shah Resignation Demand: काठमांडू के मेयर पद से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले बालेन शाह साल 2026 के चुनावों में एकतरफा जीत हासिल कर नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के पीछे नेपाल का युवा वर्ग, सोशल मीडिया की ताकत और भ्रष्टाचार विरोधी छवि थी

अपडेटेड Jun 03, 2026 पर 3:03 PM
जो युवा कभी उनके समर्थन में नारे लगाते थे, आज वही उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं

Nepal Political Crisis: नेपाल की राजनीति में इस वक्त एक नाटकीय उलटफेर देखने को मिल रहा है। कुछ महीने पहले जिन Gen-Z और छात्र संगठनों ने पारंपरिक नेताओं से तंग आकर एक बड़ी राजनीतिक लहर पैदा की और बालेन शाह को नेपाल की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाया, आज वही उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।

नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बालेन शाह से अब वही छात्र संगठन न केवल माफी की मांग कर रहे हैं, बल्कि उनके इस्तीफे पर अड़ गए हैं। जिस कोर वोटर ने उन्हें सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया, उसी के द्वारा पाला बदल लेने से बालेन शाह की सरकार पर भारी संकट मंडराने लगा है।

आखिर पीएम बालेन शाह ने ऐसा क्या कह दिया?


इस पूरे विवाद और गुस्से की मुख्य वजह प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा नेपाल की संसद में भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर दिया गया एक बयान है। कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा से जुड़े लंबे समय के सीमा विवाद पर बोलते हुए बालेन शाह ने संसद में कहा, 'नेपाल को यह समझ आया है कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है'।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दे डाला कि इस ऐतिहासिक विवाद को सुलझाने के लिए यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों को मदद करनी चाहिए, क्योंकि इस विवाद की जड़ें औपनिवेशिक काल की संधियों से जुड़ी हैं।

नेपाल की संसद से सड़कों तक मचा बवाल

प्रधानमंत्री के इस बयान ने नेपाल के भीतर एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्ष के सांसदों ने पीएम बालेन शाह पर नेपाल के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है। संसद की कार्यवाही में लगातार बाधा आ रही है और उनसे बयान वापस लेने की मांग की जा रही है।

उनके इस बयान के खिलाफ नेपाल के 10 प्रमुख छात्र संगठनों ने हाथ मिला लिया है। उन्होंने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि यह सिर्फ कोई जुबान फिसलने का मामला नहीं है, बल्कि यह देश विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

काठमांडू की सड़कों पर छात्रों ने मशाल जुलूस और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि बालेन शाह ने विवादित क्षेत्रों पर नेपाल के दावे को कमजोर किया है।

छात्रों और बालेन शाह के बीच पहले से ही थी 'रार'

यह सीमा विवाद तो सिर्फ एक जरिया बना है, असल में बालेन शाह की सरकार और छात्र संगठनों के बीच रिश्ते पहले से ही काफी तनावपूर्ण चल रहे थे। इसी साल की शुरुआत में बालेन शाह की सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार के नाम पर शैक्षणिक संस्थानों में छात्र राजनीति और छात्र संगठनों को प्रतिबंधित या सीमित करने का एक बड़ा कदम उठाया था। इस फैसले का भारी विरोध हुआ और मामला अदालत तक पहुंच गया।

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने बाद में सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिससे बालेन शाह सरकार को बड़ा झटका लगा था। तभी से छात्र संगठन उनके खिलाफ सही मौके की तलाश में थे।

युवाओं के दम पर मेयर से सीधे पीएम बने थे बालेन शाह

काठमांडू के मेयर पद से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले बालेन शाह साल 2026 के चुनावों में एकतरफा जीत हासिल कर नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के पीछे नेपाल का युवा वर्ग, सोशल मीडिया की ताकत और भ्रष्टाचार विरोधी छवि थी। जो युवा पारंपरिक राजनीतिक दलों के कुशासन से थक चुके थे, उन्हें बालेन शाह में देश का भविष्य नजर आ रहा था।

लेकिन राजनीति का पहिया इतनी जल्दी घूमेगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। जो युवा कभी उनके समर्थन में नारे लगाते थे, आज वही उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि बालेन शाह इस चौतरफा राजनीतिक घेराबंदी का जवाब कैसे देते हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।