Nepal Flood update: नेपाल में बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हुई, 290 भारतीय नागरिक अभी भी लापता, चीन ने फिर जारी किया अलर्ट
Nepal-Tibet flash flood updates: नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा कि आठ जिलों से 469 शव बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, चितवन से 178, नवलपरासी पूर्व से 110, गोरखा से 44, नुवाकोट से 37 और धादिंग जिले से 33 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह तनाहू से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं
Nepal-Tibet flash flood updates: अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायलों और फंसे हुए लोगों को निकाला जा चुका है
Nepal-Tibet flash flood updates: मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार (28 अगस्त) को बढ़कर 469 हो गई। आपदा के बाद तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रहने के बीच और शव बरामद किए गए। नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा कि आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, चितवन से 178, नवलपरासी पूर्व से 110, गोरखा से 44, नुवाकोट से 37 और धादिंग जिले से 33 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह तनाहू से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं।
अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायलों और फंसे हुए लोगों को निकाला जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में इलाज हो रहा है। बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों का मलबा तेजी से नीचे आ गया जिससे बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे का सैलाब मध्य नेपाल से होकर नीचे की ओर बह निकला। इस आपदा ने कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई तथा कई मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। इसके कारण जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।
नेपाल पुलिस के एक बयान में कहा गया कि प्रभावित इलाकों से अब तक 50 विदेशियों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए बचाया गया है। जबकि अन्य 796 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है।
290 भारतीय नागरिक अभी भी लापता
अधिकारियों के सामने एक और चुनौती आ गई है, क्योंकि मलबे की रुकावट के पीछे बढ़ता जलस्तर अचानक पानी के तेज बहाव का खतरा पैदा कर रहा है। इस स्थिति ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेपाल पुलिस ने बताया कि 28 पुलिसकर्मी अभी भी संपर्क से बाहर हैं। जबकि प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों के लिए 8,386 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, अब तक 1,545 लोग घायल हुए हैं या उन्हें बचाया गया है। मिली लाशों में से 110 नवाल्परासी ईस्ट में मिलीं, जो किसी एक जिले में मिली सबसे ज्यादा संख्या है। चितवन में 108 मौतें दर्ज की गई। जबकि गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धाडिंग में 33, तनहुन में 28 और नवाल्परासी वेस्ट में 27 लाशें मिलीं। रासुवा में 12 लाशें मिलीं।
पुलिस अपडेट में कुछ प्रभावित जिलों में घायल और बचाए गए लोगों की जानकारी भी दी गई। घायल और बचाए गए लोगों की कैटेगरी में रासुवा में 644, नुवाकोट में 898 और धाडिंग में तीन लोग शामिल थे। इस बीच, नेपाल पुलिस के अपडेट के अनुसार, काठमांडू घाटी के अलग-अलग अस्पतालों में 84 घायल लोगों का इलाज चल रहा था या उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।
चीन ने जारी किया अलर्ट
चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 'लेवल-चार' का अलर्ट जारी किया है। चेतावनी दी है कि दो नदियों के संगम के पास बनी एक नई बैरियर झील (Barrier Lake) के टूटने का खतरा काफी बढ़ गया है जिससे निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आ सकती है। बैरियर लेक वह झील होती है जो किसी प्राकृतिक रुकावट के कारण नदी या जलधारा का रास्ता बंद हो जाने से बनती है।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने गुरुवार रात तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की और छोचेन खोला तथा पुरेपु त्संगपो नदियों के संगम के पास बनी इस बैरियर झील से पैदा हुए खतरे को लेकर आगाह किया। ये दोनों नदियां तिब्बत से निकलती हैं। यह नेपाल में भोटे कोशी नदी की धारा का हिस्सा हैं।
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी 'शिन्हुआ' की खबर के अनुसार, गुरुवार सुबह तक झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। पूर्वानुमान के मुताबिक, लगातार हो रही बारिश के कारण अगले तीन दिन में झील में पानी का प्रवाह करीब 30 लाख घन मीटर तक पहुंच सकता है जिससे इसके टूटने का खतरा और बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में बाढ़ का पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है और चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग पोर्ट तथा आसपास के निचले इलाकों में भारी तबाही मचा सकता है।
इसके मद्देनजर जल संसाधन मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों को बैरियर झील और बारिश की स्थिति पर कड़ी नजर रखने, मौसम और जल प्रवाह के पूर्वानुमान तथा जोखिम के आकलन को बेहतर बनाने एवं निचले इलाकों में संभावित रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की सटीक पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, चीन ने नेपाल सीमा के पास तिब्बत के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए उपग्रहों और ड्रोनों को तैनात किया है।
'झील टूटने से एक और बड़ी आपदा आ सकती है'
चीनी अधिकारियों को आशंका है कि झील टूटने से एक और बड़ी आपदा आ सकती है। ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी ‘चीन अन्नोंग’ की आठ सदस्यीय अग्रिम टीम संचार और खोज उपकरणों के साथ बृहस्पतिवार को गिरोंग काउंटी पहुंची। टीम नदी के ऊपरी हिस्से में बने अवरोध से संबंधित आंकड़े जुटाएगी।
मौके पर मौजूद बचावकर्मियों के मुताबिक, पोर्ट से करीब तीन किलोमीटर दूर नदी के ऊपरी हिस्से में जमा मलबे को सुरक्षित रूप से हटाने से पहले अवरोधक झील के खतरे को टालना जरूरी है। फायर कर्मियों ने झील की पूरी परिधि के आसपास कई बिंदु चिह्नित करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया है। इन बिंदुओं के निर्देशांक के आधार पर झील के जल क्षेत्र का आकलन किया जा सकेगा। ड्रोन से मिले दृश्यों में पता चला कि बुधवार रात की तुलना में झील का जलस्तर बढ़ गया।