Israel-Hamas Ceasefire: नेतन्याहू ने गाजा पर दिया 'पॉवरफुल अटैक' का आदेश, हमास पर लगाया युद्धविराम तोड़ने का आरोप

Israel-Hamas Ceasefire: नेतन्याहू के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला हमास द्वारा युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन किए जाने के बाद लिया गया है। हमास पर आरोप है कि उसने पहले एक बरामद किए गए बंधक के सिर्फ आंशिक अवशेष इजराइल को सौंपे, जो समझौते का उल्लंघन था

अपडेटेड Oct 28, 2025 पर 11:05 PM
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युद्धविराम के उल्लंघन के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया

Benjamin Netanyahu: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी पर 'पॉवरफुल अटैक' करने के लिए सेना को आदेश दे दिया है। नेतन्याहू ने यह कड़ा कदम हमास पर अमेरिका की मध्यस्थता वाले युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उठाया है। यह फैसला मंगलवार को हुई उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठकों के बाद लिया गया, जिसमें सेना को गाजा में लक्ष्यों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

बंधकों को अवशेषों को लेकर बढ़ा विवाद

नेतन्याहू के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला हमास द्वारा युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन किए जाने के बाद लिया गया है। हमास पर आरोप है कि उसने पहले एक बरामद किए गए बंधक के सिर्फ आंशिक अवशेष इजराइल को सौंपे, जो समझौते का उल्लंघन था। सोमवार देर रात हमास ने जो अवशेष सौंपे उनका दावा था कि वह युद्धविराम समझौते के तहत सहमति व्यक्त किए गए 28 बंधक शवों में से 16वां था। हालांकि, इजराइली फोरेंसिक जांच में खुलासा हुआ कि वे अवशेष एक ऐसे बंधक के थे, जिसका शव लगभग दो साल पहले ही इजराइल को वापस कर दिया गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन अवशेषों को ओफिर नामक बंधक का बताया, जिसे पहले गाजा से बरामद कर लिया गया था।


सीजफायर समझौते के बाद भी नहीं लौट सकी शांति

युद्धविराम के उल्लंघन के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। मंगलवार को बाद में हमास के सशस्त्र विंग ने घोषणा की कि वह 1800 GMT (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे) पर हाल ही में मिले एक और बंधक के अवशेष सौंपेगा। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री उल्लंघन की प्रतिक्रिया में आगे के कदमों पर फैसला करने के लिए इजराइली सुरक्षा प्रतिष्ठान के प्रमुखों के साथ सुरक्षा चर्चा करेंगे।

आपको बता दें कि इजराइल और हमास के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में किया गया युद्धविराम 10 अक्टूबर को लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच टेंशन को खत्म करना था। हालांकि नए घटनाक्रम ने इस क्षेत्र में शांति प्रयासों पर एक बड़ा झटका दे दिया है, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीजफायर के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।

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