पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आएंगे, लेकिन उससे पहले आए एग्जिट पोल के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त दिखाई गई है। हालांकि, कुछ में TMC और BJP के बीच कांटे टक्कर रहने का अनुमान भी जताया गया है। इस वक्त पूरे देश की नजर बंगाल चुनाव के आने वाले नतीजों पर है और राजनीतिक माहौल भी पूरा गर्म है। इसका असर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में भी देखने मिला है। बंगाल में बीजेपी की सांभावित जीत का मुद्दा अब बांग्लादेश की संसद की तक में उठ गया है।
बांग्लादेश की जातीय संसद में एक सदस्य ने ये मुद्दा उठाया और चिंता जताई की अगर पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनती है, तो 'प्रवासियों और मुस्लिमों' को वापस उनके देश में भेज दिया जाएगा।
इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक सांसद को कहते सुना जा सकता है, "स्पीकर साहब, हम अलग-अलग इलाकों में रहते हैं और हमारी अपनी-अपनी परिस्थितियां हैं। (बीजेपी शायद) ऐसी योजना बना रही है कि बड़ी संख्या में प्रवासियों को बांग्लादेश भेज दिया जाए।"
बांग्लादेशी सांसद आगे कहते हैं, "यह भी तय नहीं है कि जो मुस्लिम (गैर-कानूनी प्रवासी) हैं, उन्हें पड़ोसी देश वापस नहीं भेजेगा। हमें एकजुट रहना होगा।"
प्रवासियों को लेकर BJP का रुख
पश्चिम बंगाल में प्रवासियों को लेकर बीजेपी का आधिकारिक रुख “जीरो टॉलरेंस” नीति का है, खासकर बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को लेकर। यही बात उनके 2026 विधानसभा चुनाव के कैंपेन का बड़ा हिस्सा है। बीजेपी “शरणार्थियों” और “घुसपैठियों” में साफ फर्क करती है।
ऐसे लोग जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हों जैसे हिंदू, सिख, बौद्ध, केंद्र BJP सरकार उन्हें शरणार्थी मानती है। जबकि ऐसे लोग जो गैर-कानूनी तरीके से रोजगार या दूसरे कारणों से आए हों, उन्हें घुसपैठिया मानती है।
बीजेपी ने अपने 2026 के चुनावी घोषणापत्र “भरोसर शपथ” में तीन कदमों की योजना बताई है:
इसका अलावा पार्टी ने चुनाव जीतने पर राज्य में CAA लागू करने का वादी भी अपने घोषणा पत्र में किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोहराया है कि भाजपा सरकार बनने पर पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को तेजी से लागू किया जाएगा, जिसका विशेष लाभ मटुआ समुदाय और अन्य शरणार्थी परिवारों को मिलेगा। भाजपा ने घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकल्प लिया है। सरकार बनने के 200 दिनों के भीतर घुसपैठियों से सरकारी भूमि को मुक्त कराने की योजना है।