Mamata vs Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल विधानसभा से हटाई गई ममता बनर्जी की कुर्सी, नए सीएम सुवेंदु अधिकारी ने क्यों लिया बड़ा फैसला?

Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari: शनिवार को सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद प्रशासनिक फेरबदल के तहत शुक्रवार रात को ममता बनर्जी की लकड़ी की कुर्सी को शिफ्ट किया गया। जिस कमरे में अब बनर्जी की कुर्सी रखी गई है, उसका उपयोग विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा किए जाने की उम्मीद है

अपडेटेड May 10, 2026 पर 8:58 AM
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Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari: शनिवार को दिन में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पिछले 15 वर्षों से राज्य विधानसभा में इस्तेमाल की जा रही कुर्सी को राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नेता प्रतिपक्ष के कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री की कुर्सी का उपयोग नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री कक्ष में उनके लिए एक अलग कुर्सी की व्यवस्था की गई है।

शनिवार को दिन में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद प्रशासनिक फेरबदल के तहत शुक्रवार रात को लकड़ी की कुर्सी को शिफ्ट किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जिस कमरे में अब बनर्जी की कुर्सी रखी गई है, उसका उपयोग विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा किए जाने की उम्मीद है।

राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई से कहा, "स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री के लिए निर्धारित फर्नीचर और आधिकारिक चिह्नों को हटा दिया गया है। नए प्रशासन के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं।" सूत्रों के मुताबिक, बनर्जी के कक्ष के बाहर लगी आधिकारिक नामपट्टिका को भी प्रक्रिया के तहत हटा दिया गया है।


तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष बनर्जी दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। इस बीच, विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर अधिकारी के नाम वाली एक नई नामपट्टिका लगा दी गई है।

अधिकारी 20 जून को मनाएंगे 'बंगाल दिवस'

पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार 'पश्चिम बंगाल दिवस' ​​20 जून को मनाने का प्रस्ताव रखेगी। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल दिवस के लिए 'पोइला बैशाख' का दिन चुना था। अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि यह तारीख 1947 में पश्चिम बंगाल के भारत में शामिल होने के ऐतिहासिक निर्णय की प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "मैं निश्चित रूप से इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल और विधानसभा के समक्ष रखूंगा।" पश्चिम बंगाल के विधायकों ने 20 जून, 1947 को विभाजन के पक्ष में मतदान किया था। जबकि पूर्वी बंगाल (जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान बन गया) के विधायकों ने राज्य के विभाजन के खिलाफ मतदान किया था।

मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद सुवेंदु भवानीपुर में जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पर गए। उन्होंने कहा, "मेरे विचार से पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस 20 जून, 1947 होना चाहिए।" सुवेंदु ने कहा कि राज्य के लोग एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश में इसलिए रह पाए क्योंकि पश्चिम बंगाल ने स्वतंत्रता से पहले भारत के साथ रहने के लिए मतदान किया था।

पश्चिम बंगाल दिवस मनाने को लेकर विवाद 2023 से उस समय शुरू हुआ, जब राज्य के स्थापना दिवस के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा निर्देश जारी करने के बाद राजभवन ने 20 जून को स्थापना दिवस मनाया। केंद्र सरकार ने 20 जून को 'पश्चिम बंगाल दिवस' ​​के रूप में सूचीबद्ध किया था, जिससे तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार और राजभवन (जिसे अब लोक भवन के नाम से जाना जाता है) के बीच टकराव शुरू हो गया था।

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पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्कालीन राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस को पत्र लिखकर इस तारीख पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, राजभवन ने 20 जून को ही समारोह का आयोजन किया।

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