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फिलिस्तीन के गाजा में बिना बकरों की बकरीद! कुर्बानी का फर्ज पूरा करने के लिए अब मजबूरी में ये काम कर रहे लोग

Gaza Eid al Adha: पिछले साल गाजा में कई लोगों ने अकाल जैसे हालातों के बीच ईद गुजारी थी। कैंप में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि, 'पिछले साल मैंने असली कुर्बानी की जगह डिब्बाबंद मीट खाकर काम चलाया था। इस साल पता नहीं क्या होगा, शायद हमारे लिए मुर्गे की कुर्बानी देना ही जायज हो जाए या फिर फ्रोजन मीट खरीदना पड़े?

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड May 27, 2026 पर 2:09 PM
फिलिस्तीन के गाजा में बिना बकरों की बकरीद! कुर्बानी का फर्ज पूरा करने के लिए अब मजबूरी में ये काम कर रहे लोग
युद्ध से पहले जो भेड़ ₹20000 में मिलती थी वो अब ₹6 लाख में मिल रही है

Eid al-Adha in Gaza: दुनिया भर के मुस्लिम जहां हर्षोल्लास के साथ ईद-उल-अजहा यानी बकरीद मनाने की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं गाजा पट्टी में इस त्योहार का रंग पूरी तरह फीका पड़ा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के साथ जारी इस विनाशकारी जंग के बीच गाजा के लोग अपने घरों से दूर शिविर कैंपों और टेंटों में लगातार तीसरी ईद मनाने को मजबूर हैं।

इस बार न तो बाजारों में कुर्बानी के लिए मवेशी बचे हैं, न ही लोगों के पास उन्हें खरीदने के पैसे। अपनों को खोने का गम और भुखमरी जैसी स्थिति के बीच भी गाजा के फिलिस्तीनी किसी तरह उम्मीद का दामन थामे हुए हैं।

₹20000 की भेड़ मिल रही ₹6 लाख में

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