Pakistan Army: मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मिली सैन्य चुनौतियों के बाद, पाकिस्तान अपनी मारक क्षमता को आधुनिक बनाने में जुट गया है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सेना ने 'रॉकेट फोर्स कमांड' के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी की पारंपरिक मिसाइल मारक क्षमता को मजबूत करना और भविष्य के युद्धों में भारत के S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चुनौती देना है।
पाकिस्तान को क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
मई 2025 के संघर्ष ने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरियों को उजागर किया था। भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी लॉन्चपैड्स और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था। पाकिस्तान के पास भारत के BrahMos और S-400 जैसे आधुनिक सिस्टम का प्रभावी जवाब देने के लिए एकीकृत कमांड की कमी महसूस की गई। पाकिस्तान ने जवाब में 'ऑपरेशन बयान-उन-मरसूस' तो चलाया, लेकिन उसे एहसास हुआ कि उसकी मिसाइल इकाइयां अलग-अलग ब्रिगेड में बिखरी हुई है, जिससे त्वरित और बड़े पैमाने पर प्रहार करना मुश्किल था।
कैसा होगा 'रॉकेट फोर्स कमांड' का मॉडल?
पाकिस्तान का यह नया कमांड पूरी तरह से चीन की 'रॉकेट फोर्स' (PLARF) की तर्ज पर आधारित है। चीन ने 2015 में अपनी रॉकेट फोर्स बनाई थी जो जमीन से छोड़ी जाने वाली परमाणु और पारंपरिक मिसाइलों का संचालन करती है। पाकिस्तान का रॉकेट फोर्स कमांड एक लेफ्टिनेंट जनरल (3-स्टार) या मेजर जनरल (2-स्टार) रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में होगा। इसमें लंबी दूरी के रॉकेट, बैलिस्टिक मिसाइल (जैसे शाहीन और गौरी), और क्रूज मिसाइलों (जैसे बाबर) को एक ही छत के नीचे लाया जाएगा।
भारत भी कर रहा 'इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स' की प्लानिंग
पाकिस्तान के इस कदम के साथ ही भारत भी अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को एकीकृत करने पर विचार कर रहा है। भारत अपनी एक अलग 'रॉकेट फोर्स' बनाने की योजना पर काम कर रहा है। वर्तमान में भारत की सामरिक बल कमान परमाणु हथियारों का प्रबंधन करती है। नई रॉकेट फोर्स का ध्यान केवल पारंपरिक हथियारों पर होगा, ताकि बिना परमाणु युद्ध छेड़े दुश्मन के ठिकानों को तबाह किया जा सके। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने उभरती तकनीकों जैसे हाइपरसोनिक मिसाइलों और AI के एकीकरण पर भी जोर दिया है।