पाकिस्तान ने LoC पर तैनात किए तुर्की के 'घातक' Bayraktar TB2 ड्रोन, जानें कितने खतरनाक है ये

Pakistan Turkish Drone Bayraktar TB2 LoC: खुफिया इनपुट यह भी बताते हैं कि पाकिस्तान ने मुजफ्फराबाद और कोटली (PoJK) के आसपास ग्राउंड-कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल लॉन्च सिस्टम तैनात किए हैं। इससे ड्रोन का ट्रांजिट टाइम घट जाता है और वे भारतीय सीमा के पास ज्यादा देर तक मंडरा सकते हैं

अपडेटेड Aug 26, 2026 पर 1:46 PM
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यह ड्रोन सिर्फ रेकी नहीं करता, बल्कि प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों से हमला करने में भी सक्षम है

Pak Bayraktar Drones Near LoC: भारत और पाकिस्तान के बीच एलओसी पर एक बार फिर तनाव गहराता दिख रहा है। शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर है कि पाकिस्तानी सेना ने भारत से सटी अपनी पश्चिमी सीमा पर तुर्की में बने Bayraktar TB2 ड्रोन की गश्त काफी बढ़ा दी है।

मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' सैन्य संघर्ष के बाद से ही दोनों देश अपनी सीमाओं पर ड्रोन और UAV का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। लेकिन एलओसी के बेहद करीब तुर्की के इस कॉम्बैट-प्रूवन ड्रोन का देखा जाना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

क्यों खतरनाक है तुर्की का Bayraktar TB2 Drone?


बायराकतार टीबी2 केवल एक सामान्य जासूसी ड्रोन नहीं है, बल्कि यह एक मीडियम-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस स्ट्राइक-सक्षम यूएवी है। इसमें लगे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर पैकेजेस रियल-टाइम इमेजरी भेजते हैं। इससे पाकिस्तानी ऑपरेटर्स भारतीय सीमा के दुर्गम इलाकों, सैन्य हलचल और पोस्टों की विस्तृत मैपिंग कर सकते हैं।

यह ड्रोन सिर्फ रेकी नहीं करता, बल्कि प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों से हमला करने में भी सक्षम है। यानी जासूसी के लिए उड़ने वाला ड्रोन जरूरत पड़ने पर तुरंत स्ट्राइक मिशन में बदला जा सकता है।

मुरीद एयरबेस बना ड्रोन ऑपरेशन्स का मुख्य अड्डा

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान अपने ड्रोन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 3 प्रमुख ठिकानों का इस्तेमाल कर रहा है:

मुरीद एयरबेस (चकवाल): यह पाकिस्तान का मुख्य यूएवी हब बन चुका है, जहां से TB2 ड्रोन संचालित हो रहे हैं।

नूर खान एयरबेस (चकाला, रावलपिंडी): यह रावलपिंडी के पास पाकिस्तान का प्रमुख सैन्य विमानन केंद्र है।

रहीम यार खान एयरबेस: यह पाकिस्तान के दक्षिणी सेक्टर में फॉरवर्ड ऑपरेशन्स बेस के रूप में काम करता है।

खुफिया इनपुट यह भी बताते हैं कि पाकिस्तान ने मुजफ्फराबाद और कोटली (PoJK) के आसपास ग्राउंड-कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल लॉन्च सिस्टम तैनात किए हैं। इससे ड्रोन का ट्रांजिट टाइम घट जाता है और वे भारतीय सीमा के पास ज्यादा देर तक मंडरा सकते हैं।

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बदला सीमा का माहौल

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के दौरान भी पाकिस्तान ने टोही, आत्मघाती ड्रोन और सशस्त्र यूएवी का भारी इस्तेमाल किया था। उस दौरान भारतीय सेना ने मुरीद, चकाला और रहीम यार खान समेत कई पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बनाकर उनके ड्रोन नेटवर्क को करारा जवाब दिया था।

भारत का 'काउंटर-ड्रोन' सुरक्षा कवच तैयार

पाकिस्तानी ड्रोनों की इस नई हलचल का मुकाबला करने के लिए भारतीय रक्षा बलों ने सीमा पर अपनी सुरक्षा ग्रिड को बेहद मजबूत कर लिया है। एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील इलाकों में स्वदेशी और आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात की गई है। रात और खराब मौसम में भी सीमा पार की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है। ड्रोनों को हवा में ही जाम करने या मार गिराने के लिए त्वरित एक्शन ग्रिड सक्रिय है।

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